पहलवानी शौक था, कबड्डी जुनून है : मंजीत (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। एक खिलाड़ी के लिए किसी एक खेल में महारथ हासिल करने के बाद किसी अन्य खेल में पारंगत होना आसान नहीं होता लेकिन हरियाणा के सोनीपत जिले के निवासी और पहली बार वीवो प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) में खेल रहे रेडर मंजीत अपवाद हैं।

नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। एक खिलाड़ी के लिए किसी एक खेल में महारथ हासिल करने के बाद किसी अन्य खेल में पारंगत होना आसान नहीं होता लेकिन हरियाणा के सोनीपत जिले के निवासी और पहली बार वीवो प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) में खेल रहे रेडर मंजीत अपवाद हैं।

पीकेएल के छठे सीजन में दिल्ली चरण के लिए यहां पहुंची पटना की टीम के इस खिलाड़ी ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कबड्डी के कारण अपने जीवन के बड़े बदलाव के बारे में विस्तार से चर्चा की।

छह फुट लंबे मंजीत कबड्डी में ताल ठोकने से पहले बचपन से लेकर 12वीं तक पहलवानी करते थे, क्योंकि उनका पूरा परिवार कुश्ती से ताल्लुक रखता है।

मंजीत ने कहा, “पहले के समय में कबड्डी को गांव का खेल माना जाता था। लेकिन मैं बचपन में कुश्ती करता था क्योंकि हमारे परिवार में सभी पहलवान रह चुके हैं। मेरे घर वाले भी चाहते थे कि मैं आगे भी कुश्ती जारी रखूं, लेकिन मेरे चाचा जो खुद कबड्डी के बड़े प्रशंसक हैं, ने ही मुझे कबड्डी खेलने के लिए प्रेरित किया।”

बकौल मंजीत, “जब पढ़ाई में मेरा मन नहीं लगा तो फिर मैंने 12वीं के बाद कबड्डी खेलना शुरू कर दिया। मेरी लंबाई की वजह से हर कोई चाहता था कि मैं आगे भी कबड्डी ही खेलूं और आज मैं खुश हूं कि मुझे कबड्डी में एक नई पहचान मिल रही है।”

मंजीत लीग में जुड़ने से पहले राष्ट्रीय टीम में कबड्डी टीम का हिस्सा थे। वह 2017 में इंटरनेशनल इनविटेशन टूर्नामेंट और इस वर्ष फेडरेशन कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं।

मंजीत ने कहा, “दो साल पहले ही सेना से जुड़ा हूं और यहां पर रहकर मैं अपनी तैयारियों को अंजाम दे रहा हूं। अपने गांव का मैं अकेला हूं जो कबड्डी का खिलाड़ी है। हालांकि इसके लिए मुझे मेरे घर वालों ने ज्यादा प्रोत्साहित किया। मैं करीब तीन किलोमीटर दूर जाकर कबड्डी खेलता था और अगर मैं आज यहां हूं तो उसी मेहनत के कारण हूं।”

उन्होंने अपने सोनीपत जिले का उदाहरण देते हुए कहा, “वैसे तो पूरे हरियाणा में खेलों का माहौल बहुत अच्छा है लेकिन हमारे जिले में आपको सभी कोई न कोई खेल खेलते हुए मिल जाएंगे।”

तीन बार की चैम्पियन पटना छठे सीजन में 15 मैचों में आठ मैच जीतकर 46 अंकों के साथ जोन-बी में दूसरे नंबर पर हैं। वहीं, मंजीत ने अब तक आठ अंक अपने नाम किए हैं।

उन्होंने लीग के छठे सीजन में पटना पाइरेट्स के प्रदर्शन पर कहा, “पटना में इस बार भी कई अच्छे खिलाड़ी खेल रहे हैं। लेकिन हर किसी का अपना-अपना दिन होता है।”

यह पूछे जाने पर कि लीग में सबसे लंबे खिलाड़ियों में शामिल होने के कारण क्या इसका फायदा मिलता? इस पर मंजीत ने कहा, “हां, जब मैं रेड मारने जाता हूं तो इसका फायदा मिलता है। इसके साथ-साथ अगर लाइन के पास कोई खिलाड़ी आपको पकड़ने की कोशिश करता है तो आप अपनी लंबाई का फायदा उठा सकते हैं।”

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