पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने 12 आतंकवादियों के सजा-ए-मौत पर मुहर लगाई

सेना के एक बयान में इन आतंकवादियों को “नागरिकों की हत्या, पाकिस्तानी सशस्त्र बलों व कानून-प्रवर्तन एजेंसियों पर हमला, स्कूलों और संचार के बुनियादी ढांचों को नष्ट” करने का दोषी पाया गया था।

सेना के इंटर-सर्विसिस पब्लिक रिलेशंस ने एक बयान में कहा कि इन दोषियों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाया गया था।

सेना ने कहा कि मजिस्ट्रेटों और निचली अदालत में मामला जाने से पहले ही उन्होंने अपराध को स्वीकार कर लिया था।

इनमें 11 दोषी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और एक दोषी सांप्रदायिक संगठन लश्कर-ए-झांगवी का है।

पाकिस्तान में दिसंबर 2014 में एक सैन्य स्कूल पर हुए आतंकवादी हमले के बाद आतंकवाद संबंधी मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए सैन्य अदालतें स्थापित की गई थीं।

कानून विशेषज्ञों के अनुसार, दोषियों के पास कानून के तहत राष्ट्रपति से अपील का अधिकार है। हालांकि इसके पहले राष्ट्रपति आतंकवाद से संबंधित सभी मामलों में दया याचिकाएं खारिज कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने राष्ट्रपति को सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की हत्या के जिम्मेदार आतंकवादियों की सभी दया याचिकाओं को अस्वीकार करने की सलाह दी थी।

करीब तीन महीने में दूसरी बार सेना प्रमुख ने आतंकवादियों के सजा-ए-मौत पर अपनी मुहर लगाई है।

जनरल राहील शरीफ ने 12 मई को पांच कट्टर आतंकवादियों के एक समूह के सजा-ए-मौत पर अपनी मुहर लगाई थी।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493