इस्लामाबाद, 11 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के एक वरिष्ठ सहयोगी ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि तालिबान के साथ वार्ता में किसी भी तरह की पूर्व शर्त नहीं लगाई जानी चाहिए।
इस्लामाबाद, 11 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के एक वरिष्ठ सहयोगी ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि तालिबान के साथ वार्ता में किसी भी तरह की पूर्व शर्त नहीं लगाई जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा, “यह जरूरी है कि सुलह-सफाई की प्रक्रिया के साथ कोई पूर्व शर्त न लगाई जाए। इससे तालिबान को वार्ता के लिए राजी करने में दिक्कत पेश आएगी।”
अजीज ने अफगानिस्तान की रुकी हुई शांति प्रक्रिया को शुरू करने की रूपरेखा बनाने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन और अमेरिका के अधिकारियों की बैठक में यह बात कही।
अजीज ने कहा, “मेल-मिलाप की इस प्रक्रिया का जोर अभी तालिबान समूहों को वार्ता की मेज तक लाने के लिए स्थितियां तैयार करने पर होना चाहिए। उनके सामने ऐसे प्रोत्साहन रखे जाने चाहिए जो उन्हें राजनैतिक लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकें। इसलिए यह जरूरी है कि इस प्रक्रिया के साथ कोई पूर्व शर्त न लगाई जाए।”
अफगान शांति प्रक्रिया के लिए चार देशों की समन्वय समिति की पहली बैठक में अफगानिस्तान मामलों के चीन और अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि और अफगानिस्तान के उप विदेश मंत्री खलील हिकमत करजई ने भी शिरकत की।
पाकिस्तान ने बीते साल जुलाई में एक बड़ी उपलब्धि तब हासिल की थी जब उसने वार्ता की मेज पर तालिबान प्रतिनिधियों और अफगान अधिकारियों को आमने-सामने बिठाया था। मुरी शांति प्रक्रिया के नाम से शुरू हुई यह कवायद उस समय विफल हो गई जब यह बात सामने आई कि तालिबान के सरगना मुल्ला उमर की मौत दो साल पहले पाकिस्तान में ही हो चुकी है।
इसके बाद चीन और अमेरिका ने फिर से अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर शांति प्रक्रिया शुरू करने के लिए दबाव बनाया। पाकिस्तान के सैन्य अध्यक्ष जनरल राहील शरीफ ने शांति प्रक्रिया को गति देने के मकसद से काबुल की यात्रा की थी।
dharmpath.com dharmpath