इस्लामाबाद, 8 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के क्वेटा शहर के एक अस्पताल में सोमवार को हुए विस्फोट में 70 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में अधिकांश वकील हैं। पाकिस्तान में इस साल का यह सबसे भीषण आतंकवादी हमला है। क्वेटा की मीडिया ने हालांकि मृतकों की संख्या 93 बताई है।
पाकिस्तान तालिबान के गुट जमात उर अरहार ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री रहमत बलूच ने इससे पहले एआरवाई न्यूज से 93 लोगों की मौत की बात कही थी। लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि 63 लोगों की मौत हुई है, जबकि अन्य घायल हैं, जिनमें कई की हालत नाजुक है।
उधर सिविल अस्पताल के निदेशक अब्दुल रहमान ने कहा कि हमले 70 लोगों की मौत हो गई और 92 घायल हो गए।
चिकित्सकों के मुताबिक, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
थर्रा देने वाला वह विस्फोट वीडियो में सुना जा सकता है, जो सिविल हॉस्पिटल के आपातकालीन वार्ड में उस वक्त हुआ, जब वहां एक वकील का शव लेने के लिए लगभग 100 वकील पहुंचे हुए थे। वकील की कुछ घंटों पहले गोली मारकर हत्या की गई थी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, बलूच ने कहा कि एक फिदायीन हमलवार ने घटना को अंजाम दिया। एक बम रोधी दस्ते ने कहा कि हमलावर ने आठ से 10 किलोग्राम विस्फोट अपने कपड़ों के अंदर छिपा रखा था। पुलिस को हमलावर के पैर मिले हैं।
पाकिस्तान तालिबान के गुट जमात उर अरचर ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
एआरवाई न्यूज ने कहा है कि मृतकों में 25 वकील तथा आज टेलीविजन के कैमरामैन शहजाद खान सहित दो पत्रकार हैं। मरने से पहले शहजाद को तेज आवाज में ‘कलमा’ पढ़ते हुए वीडियो में साफ सुना जा सकता है।
मारे गए एक अन्य कैमरामैन का नाम महमूद खान हैं, जो डॉन न्यूज से थे।
क्वेटा की उर्दू मीडिया-डेली मिल्लत, बागी टीवी तथा उर्दू पोस्ट- ने हालांकि मृतकों की संख्या 93 बताई है।
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जहां तीन दिनों के शोक की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ क्वेटा पहुंच चुके हैं। सेना प्रमुख राहील शरीफ ने घायलों से मिलने के लिए सिविल अस्पताल का दौरा किया।
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सनाउल्लाह जहरी ने विस्फोट का आरोप भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ पर लगाया है। उन्होंने घटना को लेकर यह आरोप पुलिस की टिप्पणी से पहले लगाया है।
डॉन की रपट के मुताबिक, बलूचिस्तान बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बाज मोहम्मद ककार सहित कई वकील विस्फोट में घायल हुए हैं।
विस्फोट के बाद मुठभेड़ भी हुई।
टेलीविजन रपटों के अनुसार, अराजकता के माहौल में लोग अस्पताल से बाहर भागे। विस्फोट के बाद इमरजेंसी वार्ड के गलियारे में धुआं भर गया, जिसके बाद घायलों की मदद करने वकील स्ट्रेचर लेकर अस्पताल के अंदर पहुंचे।
समा टेलीविजन के मुताबिक, फर्श खून से सराबोर है, जबकि कुछ शवों से धुआं निकल रहा है।
घटना से अवाक जिंदा बचे लोग रोते-चिल्लाते दिखे। मारे गए अधिकांश लोगों ने काला सूट व टाई पहन रखी थी।
पुलिस ने अस्पताल को चारों ओर से घेर रखा है और क्वेटा के अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है।
बलूचिस्तान के गृहमंत्री सरफराज बुगती ने कहा, “यह सुरक्षा में हुई चूक का नतीजा है और मैं व्यक्तिगत तौर पर इसकी जांच कर रहा हूं।”
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने घटना की निंदा की है और लोगों की मौत पर गहरी पीड़ा व दुख जताया है।
उन्होंने कहा, “प्रांत की शांति में खलल पैदा करने की किसी को भी अनुमति नहीं दी जाएगी। इस शांति को कायम करने के लिए बलूचिस्तान के अनगिनत लोगों पुलिसकर्मियों व सुरक्षाबलों ने बलिदान दिया है।”
पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल मलिक ने इसे बलूचिस्तान के इतिहास का सबसे काला दिन करार दिया।
यह इस साल का सबसे भीषण आतंकवादी हमला है, जिसके पहले 27 मार्च को लाहौर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में बमबारी कर 75 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था।
पूरे पाकिस्तान के वकीलों ने क्वेटा में हुई इस घटना की निंदा की है। कराची में वकीलों ने न्यायालयों का बहिष्कार किया। बार एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान ने तीन दिनों के शोक की घोषणा की है।
बलूचिस्तान में अशांति का आरोप इस्लामाबाद समय-समय पर नई दिल्ली पर लगाता रहा है।
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