नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को एक बार फिर कहा कि कर व्यवस्था पिछली तिथि के प्रभाव से लागू होने वाली नहीं होनी चाहिए। इससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
जेटली यहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रथम निदेशक डी.पी. कोहली की स्मृति में व्याख्यान दे रहे थे। जेटली ने कहा, “हमारी कर व्यवस्था सरल होनी चाहिए ताकि कर वसूली बढ़े। हमारी कर व्यवस्था पिछली तिथि के प्रभाव से लागू होने वाली नहीं होनी चाहिए। सरकार लोगों से पिछली तिथि के प्रभाव से कर नहीं लेना चाहती है।”
जेटली ने कहा, “राजमार्ग कार्यक्रम की गति धीमी हो गई है और रेलवे में निवेश नहीं हुआ है। हमें अवसंरचना क्षेत्र में 70 हजार करोड़ रुपये निवेश करने हैं। इसीलिए हमें वित्तीय घाटा घटाने में थोड़ी देरी हेगी।”
जेटली ने फरवरी में पेश बजट में वित्तीय घाटा कम करते हुए तीन फीसदी तक लाने के कार्यक्रम को एक साल के लिए और आगे खिसका दिया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय घाटा कम करने के कार्यक्रम पर अड़े रहने से विकास की गति कम हो सकती है।
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट कर संरचना को वैश्विक रूप से प्रतियोगी होना चाहिए और इसलिए मौजूदा कारोबारी साल के बजट में इसे 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है।
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