वाशिंगटन, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के अलबामा में बीते फरवरी में पुलिस अफसर के जुल्म का शिकार होने वाले एक भारतीय बुजुर्ग ने अफसर से 5 बार ‘नो इंग्लिश’ और 3 बार ‘इंडियन’ कहा था।
सुरेशभाई पटेल नामक यह बुजुर्ग इस घटना से कुछ ही दिन पहले अपने पौत्र की देखभाल के लिए अमेरिका आए थे। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक अमेरिकी अटार्नी राबर्ट पोजी ने मैडिसन की जूरी को मंगलवार को बताया कि पटेल ने अपने बेटे के घर की तरफ इशारा भी किया था और अधिकारियों को अपने साथ घर तक ले जाने की कोशिश भी की थी।
पटेल को अंग्रेजी बोलनी नहीं आती।
ए वन डॉट कॉम के अनुसार, पूर्व मैडिसन अधिकारी एरिक पार्कर के खिलाफ रंग के आधार पर अधिकारों से वंचित करने का मामला फिर से चलाया जा रहा है। अभियोजन ने कहा कि जब पुलिस अफसर पटेल को जमीन पर गिराए हुए था, उस दौरान उन्होंने किसी भी तरह की कोई हरकत अचानक नहीं की थी।
पार्कर के खिलाफ मामला पहली बार बीते महीने खत्म हुआ था और निर्णायक मंडल किसी सर्वसम्मत नतीजे पर नहीं पहुंच सका था। निर्णायक मंडल में 10-2 के मत के साथ पार्कर को छोड़ देने की राय बनी थी।
पोजी ने कहा कि पटेल के स्थिर खड़े होने के बावजूद पार्कर ने उन्हें धमकाना शुरू किया। उन्हें लात से मारा और सिर और कंधे से पकड़कर जमीन में धंसा दिया। इससे करीब डेढ़ मिनट तक बुजुर्ग पटेल मूर्छावस्था में रहे।
बचाव पक्ष के वकील राबर्ट टूटेन ने कहा कि बल के प्रयोग के लिए पटेल खुद जिम्मेदार हैं।
टूटेन ने कहा, “जब आप अमेरिका आते हैं तो हम आपसे उम्मीद करते हैं कि आप यहां के कानून का पालन करेंगे और हमारी भाषा बोलेंगे। इस घटना के लिए किसी और की ही तरह खुद मिस्टर पटेल भी जिम्मेदार हैं।”
टूटेन ने कहा कि पटेल ‘स्टाप’ समझते हैं लेकिन पुलिस अफसर के कहने के बावजूद वह दो कदम आगे बढ़े। उन्होंने अपना हाथ जेब में डाल लिया जिससे यह आभास भी हो सकता है कि जेब से हथियार निकाला जाने वाला है। कहने के बावजूद उन्होंने जेब से हाथ नहीं निकाला। दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो किसी पुलिस अफसर को सिर्फ इसलिए मार डालना चाहते हैं क्योंकि वह पुलिस अफसर है।
टूटेन ने कहा कि पटेल के साथ जो हुआ, दुखद हुआ लेकिन अफसर ने जान बूझकर कुछ नहीं किया।
लेकिन, अभियोजन ने कहा कि सबूत बता रहे हैं और पार्कर भी जानते हैं कि उन्होंने जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया था।
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