फेडरल रिजर्व के फैसले से मिलेगी बाजार को दिशा (लीड-1)

मुंबई, 13 दिसम्बर (आईएएनएस)। देश के शेयर बाजारों में अगले सप्ताह अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समीक्षा घोषणा और महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों तथा संसद में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को पारित कराने से संबंधित घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर रहेगी।

अगले सप्ताह निवेशकों की नजर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) और घरेलू संस्थागत निवेश (डीआईआई) के आकड़ों, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और तेल की कीमतों पर भी बनी रहेगी।

अमेरिका के फेडरल रिजर्व की बैठक मंगलवार 15 दिसंबर और बुधवार 16 दिसंबर को होगी, निवेशकों को उम्मीद है कि इस बैठक में फेड दरों में वृद्धि करने का फैसला कर सकता है। फेड ने दिसंबर 2008 के बाद से अपनी दर को लगभग शून्य पर कायम रखा है।

उभरती अर्थव्यवस्था को डर है कि दर बढ़ाने से वैश्विक निवेशक उभरते बाजार से बाहर निकलकर अमेरिका में निवेश करेंगे, जिस कारण उभरते बाजारों से भारी मात्रा में पूंजी का बाहर की ओर प्रवाह होगा।

जायफिन एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र नेवगी ने आईएएनएस से कहा, “मुख्य ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के फैसले पर रहेगा। फेड द्वारा मुख्य दर में 25 आधार अंक तक की वृद्धि किए जाने की संभावना 70 फीसदी से अधिक है। फेड से पैदा हुई अस्थिरता और साल के अंत में देखी जाने वाली सुस्ती से बाजार में गिरावट के आसार हैं।”

फेड के प्रभाव से देश के शेयर बाजार गिरावट के साथ-साथ मुद्रा विनिमय बाजार में डॉलर की खरीदारी बढ़ने से रुपये के मूल्य में भी गिरावट की संभावना है।

कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी डेरिवेटिव्स खंड के सहायक उपाध्यक्ष आनिंद्य बनर्जी ने आईएएनएस से कहा, “फेड ओपेन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक होने तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है।” उन्होंने कहा कि फेड की दर बढ़ने से सिर्फ रुपये की ही नहीं, बल्कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं में भी गिरावट दर्ज की जाने की संभावना है।

बाजार सोमवार 14 दिसंबर को औद्योगिक विकास दर के आंकड़े पर प्रतिक्रिया करेगा। आंकड़ा शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद जारी हुआ है। ताजा आंकड़े के मुताबिक, देश की औद्योगिक विकास दर अक्टूबर में 9.8 फीसदी रही, जो उम्मीद से काफी अधिक है।

सरकार सोमवार को ही नवंबर महीने के लिए थोक महंगाई दर के आंकड़े जारी करेगी। अक्टूबर महीने में थोक महंगाई दर नकारात्मक 3.81 फीसदी थी।

सरकार सोमवार को ही नवंबर महीने के लिए उपभोक्ता महंगाई दर के आंकड़े जारी करेगी। अक्टूबर में उपभोक्ता महंगाई दर पांच फीसदी दर्ज की गई थी।

अगले सप्ताह सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर भी निवेशकों का ध्यान रहेगा। ये कंपनियां हर महीने के मध्य और अंत में गत दो सप्ताह के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों के आधार पर तेल मूल्यों की समीक्षा करती हैं।

अगले सप्ताह संसद के शीतकालीन सत्र के घटनाक्रमों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। सत्र 26 नवंबर को शुरू हुआ है और 23 दिसंबर तक चलेगा। निवेशक खास तौर से वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित किए जाने से संबंधित घटनाक्रमों पर नजर लगाए रहेंगे। यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण लंबित है। सरकार राज्यसभा में बहुमत में तभी आ पाएगी, जब राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को जीत मिलती जाए। भाजपा को 19 महीनों के दौरान दो राज्यों- दिल्ली और बिहार में झटका लग चुका है।

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