फैबइंडिया के ट्रायल रूम में कैमरा, स्टोर सील (लीड-2)

पणजी, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने शुक्रवार को गोवा में कपड़ों की कंपनी फैबइंडिया के एक शोरूम में कपड़ों के ट्रायल के वक्त देखा कि एक सीसीटीवी कैमरे का मुंह ट्रायल रूम की ओर है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्टोर को शील कर दिया है और कथित तौर पर सीसीटीवी लगाने वाले तीन-चार लोगों को हिरासत में ले लिया है।

पुलिस ने बताया कि उत्तरी जिले की पुलिस ने स्टोर की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की है। यह स्टोर तटीय इलाके में स्थित है और इसमें सुरक्षा कैमरे को बहुत ही गलत स्थान पर लगाया गया था।

स्मृति गोवा के उत्तरी इलाके में स्थित तटीय गांव कलांगुते के एक स्टोर में गई थीं। वह कपड़े पहन कर देख रही थीं, तभी उनके एक सहायक की नजर कैमरे पर पड़ी तो उसने शोरगुल मचाना शुरू कर दिया। यह स्थान राजधानी पणजी से 20 किलोमीटर की दूरी पर है।

पुलिस अधीक्षक (उत्तरी गोवा) उमेश गांवकर ने कहा कि मामले के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 509 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। साथ ही तीन-चार लोगों को हिरासत में लिया गया है।

गांवकर ने संवाददाताओं से कहा, “हमने स्टोर को सील कर दिया है। इस मामले की जांच जारी है। स्मृति ईरानी ने भी कलांगुते पुलिस थाने में अपना बयान दर्ज कराया है।”

पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान उजागर नहीं की है। हिरासत में लिए गए सभी लोग हालांकि फैबइंडिया के कर्मचारी हैं। फैबइंडिया कपड़ों के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम है।

मामला सामने आने के बाद ईरानी के दल ने सबसे पहले कलांगुते से भारतीय जनता पार्टी के विधायक मिशेल लोबो से संपर्क किया। लोबो ने आईएएनएस से कहा कि वह पुलिस के साथ मिलकर उस सीसीटीवी कैमरे की तीन महीनों की फुटेज की जांच कर रहे हैं।

लोबो ने कहा, “कैमरा बहुत ही गलत जगह लगाया गया था, और पिछले तीन-चार महीनों की फुटेज मिली है जिसमें महिलाएं कपड़े बदल रही हैं। कई पुरुष और महिलाएं इसका शिकार हुई हैं।”

कांग्रेस ने इस बीच दावा किया कि ‘चेंजिंग रूम कांड’ गोवा का सबसे बड़ा राज है। खास तौर पर यह पर्यटन केंद्रित तटीय इलाकों में जारी है जहां पर हर साल लाखों पर्यटक आते हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता दुर्गादास कामत ने कहा, “केवल यही बुटीक नहीं, इस तरह की सुविधाओं वाले सभी स्टोरों की जांच की जानी चाहिए। एक केंद्रीय मंत्री कम से कम अधिकारियों को सचेत कर सकता है, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसा नहीं कर सकते।”

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