कोलकाता, 28 दिसंबर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ किसी तरह के संभावित तालमेल की चर्चाओं को सोमवार को जिंदा रखा। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया है कि सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए पार्टी के सांगठनिक ढांचे को मजबूत बनाया जाएगा।
पार्टी की सांगठनिक बैठक (प्लेनम) के दूसरे दिन सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी आर्थिक शोषण और सामाजिक उत्पीड़न को व्यापक पैमाने पर उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी लोगों के पास जाएगी और भाजपा व आरएसएस की ‘पूरी तरह से असहिष्णु फासीवादी हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा का विरोध करने का आह्वान करेगी।
इन चर्चाओं के बीच कि माकपा और कांग्रेस साथ भी आ सकती हैं, येचुरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए जो भी जरूरी होगा, किया जाएगा। तृणमूल को हटाकर बंगाल को और मोदी सरकार को हटाकर देश को बचाना पार्टी का मुख्य लक्ष्य है।
पश्चिम बंगाल में पार्टी के कुछ नेताओं ने कांग्रेस से समझौते का खुलकर समर्थन किया है। इस पर येचुरी ने कहा कि राज्य इकाई स्वायत्त नहीं है। इस बारे में कोई फैसला पोलित ब्यूरो में सर्वसम्मति से होने पर लिया जाएगा।
संयोग से सोमवार को ही तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस की केरल इकाई के अध्यक्ष वी.एम. सुधीरन ने कहा कि माकपा को कांग्रेस का अंध विरोध छोड़कर धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत करना चाहिए और कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की सबसे बड़ी पक्षधर है। केरल में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
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