जगदलपुर, 9 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां कहा कि हिंसा की राह पर चलने वाले दो-पांच दिनों के लिए बंदूक छोड़कर सामान्य ग्रामीण की तरह बिना अपना परिचय दिए उन बच्चों के पास जाएं, जिनके परिवार, माता-पिता उनकी हिंसा के शिकार हुए हैं। मोदी ने कहा कि उन बच्चों की पीड़ा और उनका दर्द आपके हृदय को बदल कर रख देगा।
मोदी ने नक्सलियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि कोई सरकार और कोई कानून आपके दिल में वह भावना नहीं जगा पाएगी जो ऐसे पीड़ित बच्चों के साथ बिताए हुए पल आपके भीतर भावना जगाएंगे।
प्रधानमंत्री आज अति नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में एक आमसभा को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने संबोधन के दौरान नक्सलियों के हृदय परिवर्तन का आह्वान किया। उन्होंने नक्सलियों से आग्रह किया कि यदि वे कुछ दिन ऐसे पीड़ित बच्चों के साथ बिताएंगे, तब उनका हृदय परिवर्तन होना तय है।
मोदी ने कहा, “उन बच्चों को यह न बताएं कि आप कौन हैं। मुझे विश्वास है कि वह बच्चा आपके हृदय को इतनी गहराई से छुएगा कि आप भी अंदर से हिल जाएंगे कि आपने हिंसा के नशे में क्या खोया है और क्या पाया है और आपसे कैसा पाप हुआ है। आप की गोलियों से पीड़ा पाने वाला बच्चा आपको अवश्य यह शिक्षा देगा कि हिंसा से कभी समस्या का समाधान नहीं हुआ है और न होगा।”
मोदी ने इसी संदर्भ में पंजाब का जिक्र किया और याद दिलाया कि जब पंजाब में खूनी खेल खेला जा रहा था उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह खत्म होगा, परंतु आज पंजाब में शांति है, प्रगति है, विकास है और वहां पर हिंसा का कोई स्थान नहीं है।
मोदी ने कहा, “पंजाब में आज लोग सुख और शांति से जी रहे हैं। इसी प्रकार मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस भूभाग में ऐसे गलत रास्ते पर चलने वालों के हृदय में भी मानवता अवश्य जागेगी और नक्सली हिंसा के चलते जिन स्थानीय लोगों के जीवन में मुसीबत आई है, उन्हें शीघ्र ही शांति, स्थिरता और प्रगति का वातावरण मिलेगा।”
इस संदर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री रमन सिंह द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने उन बच्चों को शिक्षा और ज्ञान का वह रास्ता सिखाया और उनके हाथ में कलम थमा दी जिन बच्चों के हाथों में नक्सली बंदूक और तलवार थमाना चाहते थे।
मोदी ने कहा, “इस बात का अनुभव मैंने दंतेवाड़ा की ज्ञान नगरी जावंगा में स्वयं अपनी आंखों से आज किया है। उन बच्चों के हृदय को आत्मविश्वास और चेतना से भरपूर मैंने वहां देखा है।”
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