काठमांडू, 13 मार्च (आईएएनएस)। भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में 14 बाघों के मारे जाने के बाद दोनों देशों के संबद्ध प्रशासन की नींद खुली है। बाघों को बचाने के लिए संयुक्त रणनीति बनाने के लिए नई दिल्ली में सोमवार को दोनों देशों के वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक करेंगे।
इस संबंध में नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे अखिलेश कर्ण ने कहा कि नई दिल्ली में होने वाली दो दिवसीय बैठक में सीमा की दोनों ओर बाघों को बचाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
जनवरी 2015 से फरवरी 2016 तक सीमा क्षेत्र में 14 बाघ मारे गए हैं जिससे दोनों देशों के संबद्ध प्रशासनिक हल्के में खलबली मच गई है। विलुप्तप्राय प्रजाति के छह बाघ नेपाल क्षेत्र में मारे गए हैं। इन पर अवैध शिकारियों की नजर गड़ी हुई है।
इस क्षेत्र में 2022 तक बाघों की संख्या दोगुना करने के लक्ष्य के साथ एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की गई थी। लेकिन, बाघ के शिकार में वृद्धि इस परियोजना के मार्ग में बाधक बन गई है।
कर्ण ने कहा कि सीमा पार क्षेत्र में चुनौतियों पर विजय पाना इस परियोजना की सफलता की कुंजी है। बैठक में इसके अलावा बाघ को बचाने के लिए संयुक्त रणनीति बनाने पर भी चर्चा होगी।
बाघ भारत के दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और बाल्मिकीनगर टाइगर रिजर्व तथा नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान, बरदिया राष्ट्रीय उद्यान और शकुन्तला वन्यजीव रिजर्व के बीच सीमा पार बाघों का आना जाना लगा रहता है। यही वजह है दोनों देशों को इस विलुप्तप्राय प्रजाति को बचाने में कठिनाई हो रही है।
भारत और नेपाल के बीच बागमती से यमुना नदी तक के क्षेत्र की 45 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि में वन्यजीवों के लिए 15 संरक्षित वन हैं।
नेपाल में जहां केवल 200 बाघ बच गए हैं, वहीं भारत में 2200 बाघ हैं।
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