पटना, 3 जून (आईएएनएस)। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद देसी शराब में इस्तेमाल होने वाले महुआ की खपत एक समस्या बन गई है। बिहार सरकार ने अब महुआ से जैम, जेली, बिस्कुट समेत अन्य खाद्य सामग्री बनाने का फैसला किया है ताकि महुआ के व्यवसाय से जुड़े लोगों को विकल्प मिल सके।
पटना, 3 जून (आईएएनएस)। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद देसी शराब में इस्तेमाल होने वाले महुआ की खपत एक समस्या बन गई है। बिहार सरकार ने अब महुआ से जैम, जेली, बिस्कुट समेत अन्य खाद्य सामग्री बनाने का फैसला किया है ताकि महुआ के व्यवसाय से जुड़े लोगों को विकल्प मिल सके।
वन और पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ताड़ी की तरह ही महुआ के फूल से खाने योग्य सामान बनाने का निर्णय लिया गया है। महुआ के फूल से अल्कोहल रहित जैम, जेली, बिस्कुट सहित अन्य खाद्य पदार्थ बनाए जाएंगे।
पिछले दिनों मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से आए वैज्ञानिक विशाखा कुम्भहानी ने महुआ के फूल को गुणकारी बताते हुए कहा था कि इसके फूल में सेब, केला और आम से अधिक प्रोटीन और कई लाभकारी तत्व पाए जाते हैं। इससे शरबत, जैम, जेली के अलावा कई अन्य तरह की चीजें बनाई जा सकती हैं।
बिहार के वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक डॉ़ डी़ क़े शुक्ला ने बताया कि पिछले दिनों विभाग ने महुआ को उपयोग में लाने के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया था, जिसमें देश के कई वैज्ञानिकों ने अपने विचार व्यक्त किए थे। कार्यशाला में यह बात स्पष्ट तौर पर सामने आई कि महुआ से जैम, जेली और बिस्कुट बनाकर महुआ के व्यवसाय से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभ में सरकारी या गैर सरकारी संस्थान के माध्यम से महुआ के पेड़ों और उसके उत्पादन के आंकड़े तैयार किए जाएंगे। किसी सोसाइटी के माध्यम से इसकी खरीद की जाएगी और महुआ से प्रसंस्करित खाद्य पदार्थ बना कर बाजार में बेचा जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
शुक्ला के मुताबिक महाराष्ट्र में वन धन, जन धन संस्थान इस दिशा में काम कर रहा है। सरकार ऐसे संस्थानों से मदद लेकर इस दिशा में एक रूपरेखा बना रही है।
महुआ के फूल ठंड के मौसम में उगते हैं और पेड़ से खुद गिरते हैं। कहा जाता है कि महुआ के फूल में प्रोटीन, खनिज, काबरेहाइड्रेट और कैल्शियम पाए जाते हैं।
बिहार में महुआ के फूल को सूखाकर देसी शराब बनाई जाती थी।
इसके अलावा बिहार में ताड़ी (नीरा) से गुड़, कैंडी और मधु बनाने की भी योजना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नीरा और ताड़ के पेड़ से मिलने वाले वाले उत्पादों के सार्थक उपयोग के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य में ताड़ के पेड़ों की गिनती और उनसे प्राप्त होने वाली नीरा का आकलन कर एक कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
पिछले दिनों तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व डीन (हॉर्टिकल्चर) डी. वी़ पुन्नुस्वामी ने नीरा और ताड़ के अन्य उत्पादों पर नीतीश कुमार के सामने एक प्रस्तुतिकरण (प्रजेंटेशन) दी थी जिसमें इन उत्पादों की बाजार में बिक्री की पूरी जानकारी दी गई थी।
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