नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित मानकों पर एलईडी बल्ब के लगभग 73 प्रतिशत ब्रांड खरे नहीं उतरते हैं। देश में दिल्ली बीआईएस मानदंडों का उल्लंघन करने के मामले में शीर्ष पर है। सोमवार को एक अध्ययन में इस बात की जानकारी दी गई।
नील्सन द्वारा चार प्रमुख भारतीय शहरों में किए गए अध्य्यन के मुताबिक नई दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद में एलईडी बल्ब ब्रांड का 76 प्रतिशत और 200 इलेक्ट्रिक रिटेल आउटलेट्स में 71 प्रतिशत एलईडी डाउनलाइटर ब्रांड्स को उपभोक्ता सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हुए पाया गया है।
प्रकाश उत्पादों के लिए उपभोक्ता सुरक्षा मानक बीआईएस और भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एंव सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा निर्धारित और लागू किए जाते हैं।
अध्ययन के मुताबिक ये नकली उत्पाद उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। इनके कारण भारत सरकार को कर राजस्व में काफी नुकसान हो रहा है, क्योंकि ये गैरकानूनी रूप से निर्मित हो रहे हैं और बेचे जाते हैं।
प्रमुख बाजारों में किए सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चला है कि एलईडी बल्ब ब्रांडों के 48 प्रतिशत निर्माताओं के पते का कोई उल्लेख नहीं था। साथ ही 31 प्रतिशत ब्रांडों के निमार्ता का नाम ही नहीं था। जिसका मतलब यह है कि ये ब्रांड भारतीय कानून नियमों का उल्लंघन करते हैं और ये गैरकानूनी रूप से निर्मित होते हैं।
एलकोमा (इलेक्ट्रिक लैंप एंड कंपोनेंट मैन्युफैक्च र्स एसोसिएशन) के अनुसार देश में कुल एलईडी बाजार की कीमत 10,000 करोड़ रुपये है। एलईडी बल्ब और डाउनलइटर्स का इस्तेमाल घरों, कार्यालयों और कार्यस्थानों में व्यापक रूप से किया जाता है जो पूरे एलईडी बाजार का 50 फीसदी है।
हेलोनिक्स टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक और एलकोमा के अध्यक्ष राकेश जुत्शी ने कहा कि इसकी संभावना है ही नहीं कि इन नकली एलईडी बल्बों और डाउनलाइटर के निमार्ताओं ने सरकार को जीएसटी का भुगतान किया हो, जिससे खजाने को भारी नुकसान हुआ है।
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