चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, “फैसले का कोई मतलब नहीं है और इसे मानना कोई मजबूरी नहीं।”
मंत्री ने कहा कि इस फैसले से दक्षिण चीन सागर में चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता तथा समुद्री अधिकार व हित किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होंगे।
एक बयान में चीन ने फैसले का विरोध किया है और कहा है कि उस फैसले के आधार पर किसी भी दावे या कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा।
मंत्रालय ने अलग से जारी एक बयान में कहा, “दक्षिण चीन सागर में चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता तथा समुद्री अधिकार व हित हैं और चीन का दक्षिण चीन सागर पर ऐतिहासिक अधिकार है।”
बयान के मुताबिक, चीन ने कुछ देशों द्वारा कुछ द्वीपों व चीन के नानशा कुंदाओ (नानशा द्वीपों) पर हस्तक्षेप, अवैध कब्जे व उन गतिविधियों का कड़ाई से विरोध किया है, जो चीन के अधिकार क्षेत्र में संबंधित समुद्री इलाकों में चीन के अधिकारों व हितों का उल्लंघन करते है।
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