बुंदेलखंड : खनन माफिया लूट रहे ‘लाल सोना’

बांदा, 12 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के किसानों के लिए सूखा भले ही अभिशाप बना हो, लेकिन यह सूखा खनन कारोबार से जुड़े माफियाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। नदियों का जलस्तर घट जाने का बेजा लाभ उठाते हुए कारोबारी पुलिस और प्रशासन के गठजोड़ से ‘लाल सोना’ यानी बालू (रेत) लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

बांदा, 12 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के किसानों के लिए सूखा भले ही अभिशाप बना हो, लेकिन यह सूखा खनन कारोबार से जुड़े माफियाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। नदियों का जलस्तर घट जाने का बेजा लाभ उठाते हुए कारोबारी पुलिस और प्रशासन के गठजोड़ से ‘लाल सोना’ यानी बालू (रेत) लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के किसान भयंकर सूखे की मार से कराह रहे हैं, वहीं बालू खनन कारोबार से जुड़े लोग नदियों से ‘लाल सोना’ यानी ‘बालू’ लूट कर मालामाल हो रहे हैं।

ऐसा भी नहीं है कि बालू के अवैध खनन की जानकारी पुलिस और प्रशासन को नहीं है। लेकिन, मजबूत गठजोड़ और ऊंची पहुंच के चलते उनका धंधा बेखौफ चल रहा है।

मध्य प्रदेश की सरहद से शुरू होने वाली केन और बागै नदी में यह गोरखधंधा कुछ ज्यादा ही चल रहा है। इन नदियों में करीब आधा दर्जन जगहों पर अवैध पुल बनाकर जलधारा तक बदल दी गई है और पोकलैंड व जेसीबी मशीनों के जरिए नदी की कोख खाली कर जंगलों में बालू डंप की गई है। हालांकि इतने के बाद भी खनिज विभाग के अधिकारी अवैध खनन को नकार रहे हैं।

सामाजिक संगठन ‘पब्लिक एक्शन कमेटी’ (पीएसी) द्वारा हाल ही में किए गए भौतिक सत्यापन में जहां केन नदी में कई अवैध पुल बनाकर बालू खनन किए जाने की पुष्टि हुई है, वहीं जंगल में डंप बालू भी पाई गई है।

संगठन की महासचिव श्वेता ने बताया, “केन नदी में रामपुर, गौर-शिवपुर, नशेनी, स्योढ़ा घाटों में खनन माफिया पोकलैंड व जेसीबी मशीनों बालू निकाली जा रही है। बागै नदी में नरैनी क्षेत्र के नौगवां, राजापुर-मोतियारी, मुगौरा, पथरा, सिरसौना, लहुरेटा, कुल्लूखेड़ा गांवों के घाटों में दिन-रात ट्रैक्टरों से बालू ढुलाई का काम किया जा रहा है, लेकिन पुलिस व प्रशासन अनजान बना हुआ है।”

संगठन की ओर से आईएएनएस को कुछ फोटो सौंपे गए हैं, जिनसे साफ जाहिर होता है कि अधिक जलभराव वाले स्थानों में बालू निकालने के लिए पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही नसेनी गांव के जंगलों में बालू डंप किया जाना प्रदर्शित होता है।

संगठन का कहना है कि बालू माफिया नदियों से बालू निकाल कर जंगल में डंप करते हैं और फिर खुद खनिज विभाग और जिला प्रशासन से मिलकर उसकी नीलामी ले ‘रवन्ना’ हासिल कर लेते हैं, ताकि जिले से बाहर भेजने में दिक्कत न हो।’

बांदा के खनिज अधिकारी हवलदार यादव ने गुरुवार को बताया, “जिले में किसी भी नदी में बालू खनन का सरकारी तौर पर आवंटन नहीं है और न ही अवैध तरीके से बालू का खनन हो रहा है।”

उनका कहना था कि जहां भी अवैध खनन की सूचना मिली, वहां कार्रवाई की गई है। लेकिन वह यह नहीं बता पाए कि अब तक कितने के खिलाफ कार्रवाई की गई? उन्होंने तो नसेनी (बांदा) गांव के जंगलों में डंप बालू को मध्य प्रदेश का क्षेत्र बता दिया।

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