बुंदेले महानगरों में बनाए जा रहे बंधुआ मजदूर

छतरपुर, 13 मई (आईएएनएस)। बुंदेलखंड में पानी की समस्या और रोजगार की अनुपलब्धता के चलते रोजगार की तलाश में महानगर जाने वाले यहां के परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म मिल रहे हैं। हाल यह है कि विभिन्न भवन निर्माण कार्य की चौकीदारी के दौरान होने वाली चोरी की सजा चौकीदार को भुगतनी पड़ती है और चोरी गए माल के बदले उसे वर्षो बंधुआ मजदूर के तौर पर ठेकेदार के घर पर चौका, बर्तन, झाडू़-पोछा लगाने जैसे काम करने होते हैं।

छतरपुर, 13 मई (आईएएनएस)। बुंदेलखंड में पानी की समस्या और रोजगार की अनुपलब्धता के चलते रोजगार की तलाश में महानगर जाने वाले यहां के परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म मिल रहे हैं। हाल यह है कि विभिन्न भवन निर्माण कार्य की चौकीदारी के दौरान होने वाली चोरी की सजा चौकीदार को भुगतनी पड़ती है और चोरी गए माल के बदले उसे वर्षो बंधुआ मजदूर के तौर पर ठेकेदार के घर पर चौका, बर्तन, झाडू़-पोछा लगाने जैसे काम करने होते हैं।

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के 13 जिलों को मिलाकर बनने वाले बुंदेलखंड में रोजी-रोटी का संकट चरम पर है। इंसान से लेकर जानवरों तक को पीने के पानी के लाले पड़े हुए हैं, फसल की पैदावार न के बराबर है।

वहीं सरकारों ने अब तक सूखा राहत के कार्य शुरू नहीं किए हैं, जिसका नतीजा यह है कि यहां के हजारों परिवार पलायन को मजबूर हैं। आलम यह है कि लगभग आधे गांव खाली पड़े हैं, हर तरफ घरों पर ताले लटके हुए हैं। अगर गांव में कोई बचा है तो वे हैं बुजुर्ग और बच्चे।

छतरपुर जिले का एक गांव है बमनौरा। यहां के बुजुर्ग मलखान सिंह (70) बताते हैं कि उनके गांव के करीब है खरदोती गांव। इस गांव में रहने वाली भागवंती लोधी का पति दिल्ली में रोजगार के लिए गया। वहां उसे एक भवन निर्माण के चल रहे काम की चौकीदारी की जिम्मेदारी मिली। वह काफी दिनों तक चौकीदारी करता रहा। एक दिन कुछ चोर आए, उन्होंने भागवंती के पति से मारपीट की।

मलखान सिंह को भागवंती ने बताया कि पहले तो चोरों ने उसके पति को इतना पीटा कि उसके हाथ-पैर टूट गए और बाद में भवन निर्माता ने उसे अपने घर में बंधुआ मजदूर बना लिया। मालिक का आरोप था कि चोरी में भागवंती का पति स्वयं शामिल है। लिहाजा, चोरी गए माल की कीमत अदा करे या उसके बदले में उसके घर का काम करे।

भागवंती के अनुसार, उसके पति को मालिक ने लगभग डेढ़ साल तक बंधक बनाकर रखा। उससे बंधुआ मजदूर की तरह घर का चौका, पानी, पोछा, झाड़ू आदि के काम कराए। एक दिन मौका मिलते ही वह वहां से भाग खड़ा हुआ। भागवंती का पति अब भी डरा-सहमा है।

सवरेदय मंडल के महामंत्री मनीष राजपूत बताते हैं कि बुंदेलखंड और चंबल इलाके से रोजगार की तलाश में जाने वाले परिवारों को ऐसी यातनाओं का सामना करना होता है, जिसकी कल्पना कर पाना संभव नहीं है। एक तरफ महिलाओं का षोषण होता है, तो दूसरी ओर किसी भी तरह की वारदात होने पर नतीजे मजदूर पुरुषों को भुगतने पड़ते हैं। उन्हें बंधुआ मजदूर बनाकर रखना आम हो गया है। भागवंती के पति के साथ जो कुछ हुआ, वह तो एक उदाहरण मात्र है।

मध्यप्रदेश सरकार बुंदेलखंड की लगभग हर तहसील को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है, मगर राहत कार्यो की अब तक शुरुआत नहीं हुई है। तालाबों की मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है, हैंडपंप खराब पड़े हैं, जलस्रोत सूख रहे हैं। वहीं हजारों परिवारों का पलायन जारी है, पलायन के दौरान मिलने वाले दर्द की दास्तान अनगिनत हैं।

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