पहल का प्रचार काफी सफल रहा है। इस सोच को पूरी दुनिया में समझा जा रहा है और इस पर व्यापक बहस हो रही है।
उन्होंने कहा, “चीन विभिन्न स्तरों पर और शिक्षाविदों से कारोबारियों तथा राजनीतिज्ञों तक इस सोच को पेशेवर ढंग से प्रचारित करने में सफल रहा है।”
मास्लोव ने कहा कि इस पहल की खास बात यह है कि यह समायोज्य है, क्योंकि हर देश अपने लिए सर्वाधिक उपयुक्त तरीकों को देखते हुए सहयोग कर सकता है।
मास्लोव ने सुझाव दिया कि चीन को इस परियोजना के लिए एक अधिक स्पष्ट विकास संरचना का निर्माण करना चाहिए।
मास्लोव ने कहा कि परियोजना का कार्यान्वयन और विकास धीमी गति से होना चाहिए, ताकि संभावित नकारात्मक प्रतिक्रिया से बचा जा सके।
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