बैंकों को फसल कर्ज पुनर्गठित करने के निर्देश

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने राज्यस्तरीय बैंकर्स समितियों से फसल कर्जो का पुनर्गठन समय पर करने को कहा है। पुनर्गठन के तहत कर्ज की अदायगी अवधि बढ़ा दी जाएगी।

यहां शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर उनसे ‘एसडीआरएफ’ का 10 फीसदी ‘स्थानीय आपदाओं’ जैसे भारी वर्षा के लिए आरक्षित रखने को कहा है, जिन्हें राष्ट्रीय आपदाओं के समतुल्य घोषित किया जाना है। राज्यों से कहा गया है कि वे इस राशि का उपयोग संकटग्रस्त किसानों की मदद के लिए करें।

यह कदम हाल ही में हुई बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से फसलों को हुए भारी नुकसान से प्रभावित किसानों एवं कृषि कार्यो में संलग्न गरीबों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित किए गए प्रमुख राहत उपायों का हिस्सा है।

बयान के अनुसार, बीमा कंपनियों से दावों को तत्काल निपटाने के लिए भी कहा गया है, लेकिन इसके साथ ही राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि वे किसानों के बीमा दावों के निपटान की औपचारिकताएं जल्द निपटाएं। संशोधित राष्ट्रीय बीमा योजना के तहत किसान फसल कटाई के नतीजों का इंतजार किए बगैर ही 25 फीसदी तक दावे पाने के हकदार हैं।

इसी तरह मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किसान जोखिम अवधि की समाप्ति से लेकर 45 दिन के भीतर दावे पाने के हकदार हैं। राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे बीमा कंपनियों के साथ बैठकें करें, ताकि दावा निपटान प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

बयान के अनुसार, एक अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय के तहत एनडीआरएफ/एसडीआरएफ के मानकों की समीक्षा स्वत: हर साल अप्रैल महीने के दौरान की जाएगी। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सालाना महंगाई के आधार पर यह समीक्षा की जाएगी और इसे 100 के अगले गुणक के समरूप बनाया जाएगा।

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले ही घोषित कर चुके हैं कि अब से 33 फीसदी या उससे ज्यादा फसल के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में भी किसान कच्चे माल (इनपुट) पर सब्सिडी पाने के हकदार होंगे। इससे पहले किसानों को कच्चे माल पर सब्सिडी तभी मिलती थी जब उनकी 50 फीसदी या उससे ज्यादा फसल क्षतिग्रस्त हो जाया करती थी।

प्रकृति की मार से त्रस्त किसानों की मुश्किलें कम करने के लिए उठाए गए अन्य कदमों में निम्नलिखित शामिल हैं:

– कृषि भूमि के अवसादन के चलते भूमि एवं अन्य हानियों के मामले में सहायता राशि को प्रति हेक्टेयर 81,00 रुपये से बढ़ाकर 12,200 रुपये कर दिया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि भूमि में पड़े मलबे को हटाने और मछली फार्मो की बहाली या मरम्मत पर भी सहायता राशि का यह मानक लागू होगा।

– भूस्खलन, हिमस्खलन, नदियों की दिशा में परिवर्तन के चलते भूमि के बड़े हिस्से का नुकसान होने के मामले में वित्तीय मदद को छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर 25000 रुपये से बढ़ाकर 37500 रुपये कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी कैबिनेट के सहयोगियों से बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से प्रभावित राज्यों का दौरा करने को कहा है।

इस बीच, कृषि मंत्रालय ने देरी किए बगैर राज्यों को राज्य आपदा राहत कोष से राहत वितरित करने का निर्देश दिया है। कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को यह भी निर्देश दिया है कि वे कृषि बीमा योजनाओं के तहत दावों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करें।

प्याज एवं आलू की फसलों को हुई क्षति के मद्देनजर कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने ऐसे सभी राज्यों को पत्र लिखकर बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत इनकी खरीदारी करने एवं इनका स्टॉक बनाए रखने का निर्देश दिया है जहां प्याज एवं आलू की कीमतें बढ़ने की प्रबल संभावना है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं।

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