चेन्नई, 20 मार्च (आईएएनएस)। भारी-भरकम बुरे ऋण और उसके लिए बड़े प्रोविजनिंग किए जाने से बैंकों का लाभ प्रभावित होने तथा अब छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर घटाए जाने के बाद यह माना जा सकता है कि संभवत: देश के बैंक निकट भविष्य में अपनी दर नहीं घटाएंगे।
चेन्नई, 20 मार्च (आईएएनएस)। भारी-भरकम बुरे ऋण और उसके लिए बड़े प्रोविजनिंग किए जाने से बैंकों का लाभ प्रभावित होने तथा अब छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर घटाए जाने के बाद यह माना जा सकता है कि संभवत: देश के बैंक निकट भविष्य में अपनी दर नहीं घटाएंगे।
ऐसा कहना है कि विशेषज्ञों का। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि म्यूचुअल फंड तथा अन्य योजनाओं के जरिए निकट भविष्य में शेयर बाजारों में निवेश बढ़ेगा।
पिछले दिनों सरकार ने विभिन्न छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर घटा दी। जमा दर अधिक होने के कारण ऋण दर नहीं घटाने के बैंकों के तर्क के कारण यह फैसला किया गया।
पीपीएफ की दर 8.7 फीसदी से घटाकर 8.1 फीसदी कर दी गई, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेटट की दर 8.5 फीसदी से घटाकर 8.1 फीसदी कर दी गई, किसान विकास पत्र की दर 8.7 फीसदी से घटाकर 7.8 फीसदी कर दी गई, पांच साल की रिकरिंग जमा की दर 8.4 फीसदी से 7.4 फीसदी की गई। यहां तक कि बालिका योजना ‘सुकन्या समृद्धि खाता’ (एसएसए) की दर भी 9.2 फीसदी से घटाकर 8.2 फीसदी कर दी गई।
कई सावधि जमा योजनाओं की दर भी घटी। बैंकों का कहना था कि छोटी बचत योजना को कर लाभ मिलने के कारण वे अधिक दर देने के लिए बाध्य थे।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के महासचिव ए दीदार सिंह ने एक बयान में कहा, “छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर की समीक्षा के बाद उम्मीद है कि बैंक ऋण दर घटाने के लिए तुरंत समीक्षा करेंगे।”
बैंकों की अपनी समस्या के कारण हालांकि यह भी संभावना है कि बैंक अपनी ऋण दर नहीं घटाए।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग के वित्तीय संस्थान खंड के निदेशक सास्वत गुहा ने आईएएनएस से कहा, “निकट भविष्य में संभव है कि बैंक दर नहीं घटाए, लेकिन छोटी बचत योजनाओं पर दर घटने का उपयोग वे कोष जुटाने में कर सकते हैं।”
मुंबई की कंपनी फायनेंशियल फ्रीडम गोल्डेन प्रैक्टिसेज की भुवना श्रीराम ने आईएएनएस से कहा, “छोटी बचत योजना की दर में कटौती उतनी भी बुरी नहीं है। बचतकर्ता अब अपनी कुछ बचत राशि शेयर बाजारों, म्यूचुअल फंडों तथा अन्य ऐसी योजनाओं में निवेश कर सकते हैं, जहां अधिक रिटर्न मिलता है।”
श्रीराम ने कहा, “पीपीएफ की दर पहले 15 साल में 12 फीसदी तक थी। आखिरी 15 साल में यह घटकर करीब 8.5 फीसदी पर आ गई है। (इस आखिरी 15 साल में) देश की जीडीपी और उससे भी अधिक प्रति व्यक्ति आय के साथ क्या हुआ?”
उनके मुताबिक जब जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय बढ़ती है, तब लोगों के पास खर्च के योग्य अधिक पैसा होता है। वहीं सरकार भी रोजगार बढ़ाने के लिए खर्च बढ़ाती है। इससे देश में पूंजी निवेश बढ़ता है।
श्रीराम ने कहा, “ऐतिहासिक रूप से गत 35 साल के अच्छे और बुरे दिनों के बाद भी शेयर बाजारों ने सालाना औसत 17 फीसदी रिटर्न दिया है, जो छोटी बचत योजनाओं की करीब ढाई गुनी है।”
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