बीजिंग, 7 मार्च (आईएएनएस)। पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) के दैनिक ने सोमवार को कहा कि सेना को बैरकों में स्मार्टफोन के उपयोग से संबंधित नियम की समीक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि इसमें गोपनीयता भंग होने का खतरा है।
जुलाई 2015 में पीएलए ने एक दस्तावेज जारी किया था, जिसमें अधिकारियों और सैनिकों को अपने बैरकों में खाली समय में स्मार्टफोन का प्रयोग करने की अनुमति दी गई थी।
दैनिक द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 5 पीएलए इकाइयों और सैन्य विश्वविद्यालय के 387 प्रतिभागियों में से 76 फीसदी स्मार्टफोन का प्रयोग करते हैं और 80 फीसदी को बैरकों या परिसर में इसका प्रयोग करने की अनुमति है।
कई सैनिकों व अधिकारियों का मानना है कि स्मार्टफोन संबंधी नियमों में ढील देनी चाहिए, क्योंकि अक्सर बैरकों में काफी कम कंप्यूटर उपलब्ध होते हैं। अधिकारी ली ड्यूओ बताते हैं, “बैरकों के अपेक्षाकृत बंद माहौल में कई सैनिकों को लगता है कि बिना इंटरनेट के वे अलग-थलग पड़ गए हैं।”
जहां सेनाएं और अधिक इंटरनेट का इस्तेमाल करने को उत्सुक हैं, वहीं गुप्त सूचनाएं सार्वजनिक होना चिता का विषय है।
गोपनीय दस्तावेज प्रबंधन का काम करने वाले सैनिक चेन शिजा का कहना है कि जीपीएस, कैमरा और आंकड़ों के आदान-प्रदान के कारण स्मार्टफोन का प्रयोग करना सेना के काम की गोपनीयता के लिए एक खतरा है।
इस सर्वेक्षण से पता चला कि प्रतिभागियों में 70 फीसदी सैनिकों ने अपने फोन का प्रयोग बैरक और परिसर की तस्वीरें लेने में किया और उनमें से आधे ने कभी जीपीएस प्रणाली की तरफ ध्यान भी नहीं दिया।
हालांकि संचार इकाई के प्रमुख मा लिग के अनुसार, सूचनाओं का अवांछित प्रसार रोकने के लिए कुछ बैरकों में विशेष स्मार्टफोन का प्रयोग होना चाहिए, जिसमें ब्लूट्रथ, जीपीएस, रिमूवेवल स्टोरेज जैसे फंक्शन मौजूद नहीं हो।
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