स्वीडन, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। ब्रिटेन के तीन वैज्ञानिकों -डेविड जे. थौलेस, एफ. डंकन एम. हाल्डेन और जे. माइकल कोस्टरलिट्ज- ने मंगलवार को भौतिकी का नोबल पुरस्कार जीता। इन्हें यह पुरस्कार टोपोलॉजिकल फेज ट्रांजीशन और टोपोलॉजिकल फेज ऑफ मैटर के सैद्धांतिक खोज के लिए दिया गया है।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ सांइसेज ने यह पुरस्कार सिएटल के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के थौलेस, अमेरिका के न्यूजर्सी स्थित पिं्रसटन विश्वविद्यालय के हाल्डेन और न्यूजर्सी के ब्राउन विश्वविद्यालय के कोस्टरलिट्ज को देने का फैसला किया है। इन्हें यह पुरस्कार उन्नत गणितीय तरीकों से असामान्य चरणों या पदार्थ की अवस्थाओं जैसे सुपरकंडक्टर, सुपरफ्लुइड या पतली चुंबकीय फिल्म के अध्ययन के लिए दिया गया।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, “साल 1970 की शुरुआत में, कोस्टरलिट्ज और थौलेस ने उस समय के मौजूदा सिद्धांत को बदल दिया था कि सुपरकंडक्टिविटी या सुपरफ्लुईडिटी को पतली परतों में पैदा नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रदर्शित किया कि सुपरकंडक्टिविटी कम तापमान पर पैदा नहीं की जा सकती और इसकी क्रियाविधि भी बताई। फेस ट्रांजीशिन की वजह से उच्च तापमान पर सुपरकंडक्टिविटी गायब हो जाती है।”
बयान में कहा गया है, “साल 1980 में थौलेस बहुत पतली विद्युत चालक परतों में पिछले एक प्रयोग को दिखाने में सक्षम थे, जिसमें चालकता को एक पूर्णाक के रूप में मापा गया था। उन्होंने दिखाया कि ये पूर्णाक अपनी प्रकृति में टोपोलॉजिकल रहे। करीब एक ही समय में डंकन हाल्डेन ने यह खोजा कि टोपोलॉजिकल अवधारणा का इस्तेमाल कैसे कुछ पदार्थो में पाए जाने वाले छोटो चुंबकों की श्रृखंला के गुणों को समझने में हो सकता है।”
नोबल पुरस्कार की आधिकारिक वेबसाइट पर एक बयान में कहा गया है कि इनके इस अनुसंधान कार्य से पदार्थो की नई अवस्थाओं की खोज का कार्य एक नए चरण में है। इससे बहुत से लोग दोनों पदार्थ विज्ञान और इलेक्ट्रॉनिक्स के भविष्य में होने वाले इस्तेमाल के बारे में आशान्वित हैं।
साल 2015 का भौतिकी का नोबल पुरस्कार संयुक्त रूप से तक्काई काजीता और आर्थर बी. मैकडोनाल्ड की ‘न्यूट्रीनो के दोलनों की खोज’ के लिए दिया गया, जो दिखाता है न्यूट्रीनो में भार होता है।
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