सिंगापुर, 4 जुलाई (आईएएनएस)। रियल एस्टेट सेवा क्षेत्र की कंपनी जेएलएल के अध्यक्ष अनुज पुरी ने सोमवार को कहा कि यूरोपीय संघ से बाहर होने के ब्रिटेन के जनमत संग्रह के फैसले का भारतीय प्रॉपर्टी बाजार में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश पर बहुत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पुरी के अनुसार, भारतीय अचल संपत्ति में जो कुल विदेशी निजी इक्विटी (पीई) है, उसमें ब्रिटेन की हिस्सेदारी मात्र 50 करोड़ डॉलर है (लगभग दो प्रतिशत) जबकि पूरे यूरोप का निवेश 1.9 अरब डॉलर (करीब आठ प्रतिशत) है। इस तरह रियल्टी सेक्टर में यूरोप स्थित फंड के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रभाव बहुत कम है।
उन्होंने कहा, “ब्रेक्सिट का भारतीय रियल्टी में पीई प्रवाह पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह संभव है कि ब्रिटेन और शेष यूरोप से निवेश भारतीय रियल्टी में एफडीआई के रूप में अमेरिका और एशिया पेसिफिक मुख्यालय स्थित पीई फंड के जरिए हो। दोनों वर्गो ने भारतीय रियल्टी में बहुत अधिक निवेश कर रखा है।”
विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रेक्सिट के फैसले से अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए अल्पकालिक अवसर आ सकता है, हालांकि बाजार सतर्क ही रहेगा।
ब्रेक्सिट के बाद कई बाजारों में उथल-पुथल है और पौंड का तेजी से अवमूल्यन हुआ है। बहुत अनिश्चितता है और ऐसा कोई पहले का पूर्व उदाहरण नहीं है, इसलिए एशिया प्रशांत महासागरीय रियल एस्टेट निवेशक और कॉरपोरेट जगत के लोग जोखिम कम करने के बारे में सोच रहे हैं।
जेएलएल के एशिया प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंथनी कॉज ने कहा कि ब्रेक्सिट का प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। हम एशियाई कारपोरेट के ब्रिटेन में संचालन में संभवत: कमी देखेंगे। हालांकि दीर्घकालिक रूप से ब्रिटेन के ईयू से बाहर होने की बातचीत में जब एक बार स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी, तो हम समझते हैं कि भरोसा लौट आएगा।
उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी बाजार में थोड़ा संशोधन होगा लेकिन उसे एक फिर से उभरने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
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