लंदन, 21 जून (आईएएनएस/सिन्हुआ)। ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहेगा या नहीं रहेगा, इस मुद्दे पर होने वाले जनमत संग्रह से दो दिन पूर्व ब्रिटेन में अनिश्चितता, मतभेद और तनाव का माहौल है। इसके लिए प्रचार मंगलवार को भी जारी रहा।
लंदन, 21 जून (आईएएनएस/सिन्हुआ)। ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहेगा या नहीं रहेगा, इस मुद्दे पर होने वाले जनमत संग्रह से दो दिन पूर्व ब्रिटेन में अनिश्चितता, मतभेद और तनाव का माहौल है। इसके लिए प्रचार मंगलवार को भी जारी रहा।
गुरुवार को ईयू समर्थक लेबर पार्टी के सांसद जो कॉक्स की हत्या के बाद तीन दिन तक बंद रहा प्रचार फिर शुरू हो गया। ईयू में रहने और इससे अलग होने के पक्षधर दोनों खेमे समर्थन जुटाने के लिए अंतिम घड़ी तक प्रयास करते नजर आए। सोमवार को हुए सर्वेक्षण में भी आगामी चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई।
‘डेली टेलीग्राफ’ के लिए ओआरबी सर्वेक्षण के नतीजों में ईयू में बने रहने के पक्ष में मतदान का प्रतिशत 53 रहा, जबकि इससे अलग होने के पक्ष में 46 प्रतिशत रहा।
सामाजिक अनुसंधान संस्था ‘नैटसेन’ द्वारा 16 मई से 12 जून के बीच कराए गए सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि ईयू में बने रहने के पक्ष में 53 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि इससे अलग होने के पक्ष में 47 प्रतिशत रहा। जबकि ‘यूजीओवी’ द्वारा साप्ताहांत में कराए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण में ईयू छोड़ने के पक्ष में मतदान का अनुपात थोड़ा अधिक रहा। इसके अनुसार ईयू छोड़ने के पक्ष में 44 प्रतिशत, जबकि इसमें बने रहने के पक्ष में 42 प्रतिशत मतदान हुआ।
राजनीतिक रणनीतिकार लायंटन क्रॉसबाय ने कहा, “ओआरबी के नवीनतम और अंतिम सर्वेक्षण के सभी संकेत जनमत संग्रह के नतीजे की ओर इशारा करते हैं।”
सर्वेक्षण के ईयू में बने रहने की ओर झुकाव लिए नतीजों से सोमवार को बाजार में पाउंड स्टर्लिग थोड़ा मजबूत हुआ था और मंगलवार को एशियाई शेयरों में तेजी आई।
अरबपति जॉर्ज सोरोस ने चेतावनी दी है कि ब्रेक्सिट (ईयू से बाहर होने) के नतीजों से पाउंड में कम से कम 15 फीसदी की गिरावट आएगी और इसके कारण “वित्तीय बाजार, निवेश, कीमतों और नौकरियों पर तत्कालिक और आश्चर्यजनक प्रभाव पड़ेगा।”
सोरोस ने कहा कि शक्तिशाली सट्टा बल ब्रिटिश सरकार या मतदाताओं की किसी भी गलती का लाभ उठाने को उत्सुक हैं।
जोखिम के बीच गुरुवार के मतदान को ब्रिटेन और यूरोप दोनों के राजनीतिक और आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री डेविड कैमरन सहित इसमें रहने के पक्षधर अलग होने के खतरों और ईयू से मिल रहे आर्थिक लाभों का तर्क दे रहे हैं।
वहीं, ईयू से अलग होने के पक्षधर अप्रवासियों के प्रवाह पर ईयू के नियमों को दोष दे रहे हैं। उनका मानना है कि इसके कारण जन सुविधाओं और नौकरियों पर दबाव बढ़ा है।
ईयू सदस्यता पर मतदान को लेकर ब्रिटिशों में ध्रुवीकरण हो गया है। गुरुवार को हुई कॉक्स की हत्या इसके गहरे प्रभाव को दर्शाती है।
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