नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। देश में स्मार्ट शहरों की परिकल्पना भारतीय जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए। इसे व्यावहारिक, लोगों की जरूरतों के मुताबिक और सस्ता भी बनाना होगा। यह बातें केंद्रीय बिजली, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने बुधवार को कही।
गोयल ने दूसरे स्मार्ट सिटी इंडिया 2016 एक्सपो में कहा, “हमें स्मार्ट शहरों की परिकल्पना भारतीय जरूरतों के हिसाब से करनी होगी। इस पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। इसके बाद भारतीय जरूरत के हिसाब से स्मार्ट शहरों की परिकल्पना को लागू किया जा सकता है।”
गोयल ने कहा, “देश में स्मार्ट शहरों की परिकल्पना लागू करने में बड़े पैमाने पर निर्माण का अर्थशास्त्र, एक अरब से ज्यादा लोगों की आकांक्षाएं, भारतीय जरूरत के हिसाब से व्यावहारिकता और कार्यक्रम के सस्ते होने जैसे मुद्दे बेहद अहम होंगे। हमें बड़े पैमाने पर निर्माण के अर्थशास्त्र और इस संबंध में नए विचारों को तेजी से लागू करने पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे विचार जो वास्तविकता में लोगों के लिए कारगर साबित हों। ये परिकल्पनाएं इस तरह लागू हों जिससे यह दिखे कि स्मार्ट शहर कैसे होंगे।”
पीयूष गोयल ने ऊर्जा सक्षमता कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि एलईडी बल्ब के निर्माण में 83 फीसदी लागत कटौती इसलिए हो पाई क्योंकि बड़े पैमाने पर इस कार्यक्रम को अपनाया गया। एलईडी बल्बों के इस्तेमाल से भारत के लोग हर साल 65 अरब डॉलर का बिजली बिल बचाएंगे।
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