नई दिल्ली, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। बड़े पैमाने पर फंसे हुए कर्जो (एनपीए) या बुरे कर्जो के कारण सरकारी बैंक दुबारा पूंजी जुटाने के लिए विभिन्न माध्यमों की खोज कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी।
नई दिल्ली, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। बड़े पैमाने पर फंसे हुए कर्जो (एनपीए) या बुरे कर्जो के कारण सरकारी बैंक दुबारा पूंजी जुटाने के लिए विभिन्न माध्यमों की खोज कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी।
यूको बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. के. ठक्कर ने बीटीवीआई चैनल से कहा, “सरकारी बैंकों के लिए बैंकों का पूंजीकरण सबसे बड़ा मुद्दा है। हमें एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) के मामलों के साथ उच्च प्रावधान करना होगा।”
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़े बकाएदारों की दूसरी सूची बनाई है, जिन्होंने लिए गए कर्ज का भुगतान नहीं किया है। आरबीआई ने बैंकों से इन कजरे की वसूली कर मुद्दे का समाधान करने को कहा है।
इस साल जून में आरबीआई ने 12 बड़े बकाएदारों के खातों की पहचान की थी, जिन पर सरकारी बैंकों के कुल एनपीए का करीब 25 फीसदी बकाया है। इन पर दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत कार्रवाई की जा रही है।
ठक्कर ने कहा, “हम विभिन्न ोतों से पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.. हमने सरकार से भी मदद का आग्रह किया है, लेकिन बजटीय संतुलन के कारण हमें पूजी जुटाने के लिए बाजार में भी जाना होगा। यह उपयुक्त समय पर किया जाएगा।”
उन्होंने कहा चालू वित्त वर्ष में यूको बैंक की पूंजी जरूरत 3,000 करोड़ रुपये है और एनसीएलटी मामलों के प्रावधान के कारण इस जरुरत में 500-600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
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