नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त उर्वर भूमि पर, भारत एक जीवंत लोकतंत्र के रूप में विकसित हुआ है। इसकी जड़ें गहरी हैं परंतु पत्तियां मुरझाने लगी हैं। अब इसमें नई कोपलें आने का समय है।
देश के 69वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के नाम संबोधन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, “हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त उर्वर भूमि पर, भारत एक जीवंत लोकतंत्र के रूप में विकसित हुआ है। इसकी जड़ें गहरी हैं, परंतु पत्तियां मुरझाने लगी हैं। अब नई कोपलों का समय है।”
उन्होंने कहा, “यदि हमने अभी कदम नहीं उठाए तो क्या सात दशक बाद हमारे उत्तराधिकारी हमें उतने ही सम्मान तथा प्रशंसा के साथ याद कर पाएंगे जैसा हम 1947 में भारतवासियों के स्वप्न को साकार करने वालों को याद करते हैं। भले ही उत्तर सहज न हो परंतु प्रश्न तो पूछना ही होगा।”
राष्ट्रपति ने कहा, “भारत 130 करोड़ नागरिकों, 122 भाषाओं, 1600 बोलियों तथा सात धर्मो का एक जटिल देश है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में यह एक ऐसा देश है जो ‘मजबूत परंतु अदृश्य धागों’ से एक सूत्र में बंधा हुआ है तथा ‘उसके ईर्द-गिर्द एक प्राचीन गाथा की मायावी विशेषता व्याप्त है, मानो कोई सम्मोहन उसके मस्तिष्क को वशीभूत किए हुए हो। वह एक मिथक है और एक विचार है, एक सपना है और एक परिकल्पना है, परंतु साथ ही वह एकदम वास्तविक साकार तथा सर्वव्यापी है’।”
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