भारत की एनएसजी उम्मीदों पर चीन ने पानी फेरा

बीजिंग, 20 जून (आईएएनएस)। भारत को झटका देते हुए चीन ने सोमवार को कहा कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) किसी नए देश को शामिल करने को लेकर विभाजित है और इसकी सदस्यता के लिए भारत के आवेदन पर इस हफ्ते सियोल में होनेवाली 48 सदस्यीय समूह की बैठक में विचार नहीं किया जाएगा।

बीजिंग, 20 जून (आईएएनएस)। भारत को झटका देते हुए चीन ने सोमवार को कहा कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) किसी नए देश को शामिल करने को लेकर विभाजित है और इसकी सदस्यता के लिए भारत के आवेदन पर इस हफ्ते सियोल में होनेवाली 48 सदस्यीय समूह की बैठक में विचार नहीं किया जाएगा।

चीन का यह बयान भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा वैश्विक परमाणु व्यापार नियामक संस्था, एनएसजी की सदस्यता के लिए चीन का समर्थन प्राप्त करने का भरोसा जताने के एक दिन बाद आया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने यहां कहा, “एनएसजी में वर्तमान परिस्थितियों में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर रहे सदस्य को शामिल करने को लेकर राय बंटी हुई है। हमें आशा है कि इस बारे में विस्तृत विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।”

हुआ ने कहा, “एनपीटी की बैठक के एजेंडे में गैर एनटीपी सदस्यों को लेकर चर्चा नहीं होगी। इस साल सियोल में होने वाली बैठक में इस पर कोई चर्चा नहीं होगी।”

एनएसजी ही वैश्विक परमाणु व्यापार को नियंत्रित करती है। इसकी अहम बैठक 23-14 जून को सियोल में होने वाली है, जहां भारत और पाकिस्तान की सदस्यता के आवेदन पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

रविवार को स्वराज ने कहा था कि चीन एनएसजी में ‘भारत के प्रवेश का विरोधी’ नहीं है, बल्कि वह भारत के इस समूह में प्रवेश करने के मानदंडों और प्रक्रियाओं के बारे में सिर्फ बात कर रहा है।

चीन ने इस आधार पर इस समूह में भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है कि एनएसजी में शामिल होने के लिए परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर आवश्यक है। बीजिंग ने यह भी कहा है कि यदि भारत को एनएसजी में शामिल किया जाता है तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

भारत का कहना है कि परमाणु अप्रसार संधि भेदभावपूर्ण है। वहीं, भारत के समर्थन में अमेरिका, स्विटजरलैंड, मेक्सिको, इटली, रूस और ब्रिटेन जैसे देश् हैं, जबकि न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका भारत का विरोध कर रहे हैं। इसमें नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी सदस्यों की सहमति आवश्यक है।

सुषमा ने रविवार को यह भी कहा था कि भारत किसी देश को इसमें शामिल करने का विरोध नहीं करेगा, बल्कि हम चाहते हैं कि सभी आवेदनों पर योग्यता के आधार पर विचार किया जाए।

पिछले हफ्ते चीन के दौरे पर गए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी वहां के शीर्ष नेतृत्व के सामने यह मामला उठाया था।

चीन की मीडिया का कहना है कि एनएसजी में भारत को शामिल करने से दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बिगड़ जाएगा और समूचे एशिया प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता पर बादल छा जाएंगे।

चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने इस हफ्ते प्रकाशित संपादकीय में कहा है कि चीन इस विशिष्ट परमाणु समूह में भारत को शामिल करने का समर्थन कर सकता है, बशर्ते भारत इसमें शामिल होने के लिए कोई जोड़-तोड़ न करे।

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