नई दिल्ली – भारत का लक्ष्य 2027 तक स्थानीय स्तर पर फैलने वाले मलेरिया के मामलों को शून्य तक लाना और 2030 तक इस बीमारी को खत्म करना है. हालांकि, ज़मीन पर काम कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से कुछ इलाकों में मामले फिर से बढ़े हैं.2025 में नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 33 ज्यादा प्रभावित जिलों, जिनमें मिजोरम, ओडिशा, त्रिपुरा, असम, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं, में देश के मलेरिया के 64 प्रतिशत मामले और मलेरिया से होने वाली 54 प्रतिशत मौतें दर्ज की गईं.
मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में भारत को काफी सफलता मिली है और अब 160 से ज्यादा जिलों को मलेरिया मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन आखिरी पड़ाव सबसे मुश्किल साबित हो रहा है. संक्रमण अब कुछ ऐसे इलाकों तक सीमित हो गया है, जहां मलेरिया बहुत ज्यादा फैलता है और जहां तक पहुंचना, मामलों का पता लगाना और बीमारी को पूरी तरह खत्म करना ज्यादा मुश्किल है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2022 से 2024 के बीच हर साल 30,000 से ज्यादा पक्के मलेरिया के मामले सामने आए. झारखंड में मामले 2022 के 19,167 से बढ़कर 2024 में 42,352 हो गए, जबकि ओडिशा में इसी अवधि के दौरान मामले 23,770 से बढ़कर 68,693 हो गए.
आंध्र प्रदेश में भी तीन साल में मामले काफी बढ़े. 2022 में 5,268 मामले थे, जो 2024 में बढ़कर 7,866 हो गए और आखिर में 2025 में 7,878 तक पहुंच गए. जुलाई तक आंध्र प्रदेश में 6,414 मामले और 5 मौतें दर्ज हो चुकी हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं.
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