बर्लिन, 30 मई (आईएएनएस)। आतंकवाद को आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि दुनिया भर की सभी मानवतावादी ताकतों को इस बुराई से लड़ने के लिए एक साथ आना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी हिंसा के सभी रूपों की निंदा करते हैं तथा उनके खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत पर सहमति हैं, जो आतंकवादियों को बढ़ावा देते हैं, समर्थन तथा वित्तपोषण करते हैं और उन्हें पनाह देते हैं।
प्रधानमंत्री का यह आह्वान जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान सामने आया। इससे पहले दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाने को लेकर चांसलरी में अंतर-सरकारी विमर्श के माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने 12 समझौतों व समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें डिजिटाइजेशन, कौशल विकास, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्र, रेलवे सुरक्षा तथा सतत शहरी विकास के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।
मोदी ने कहा, “आतंकवाद तथा ओछी सोच आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत बड़ी चुनौती है और दुनिया भर की मानवतावादी शक्तियों का इस बुराई से निपटने के लिए एकसाथ आना समय की मांग है। इस तरह के हालातों से हमें किस प्रकार निपटना चाहिए, इसे लेकर दोनों देशों के विचार समान हैं।”
वहीं, मर्केल ने कहा कि सोमवार रात रात्रिभोज के दौरान उन्होंने मोदी के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देश आतंकवाद के नतीजों से जूझ रहे हैं।
बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में मोदी तथा मर्केल ने कहा कि उनकी साझा चिंता आतंकवाद व अतिवाद का खतरा तथा वैश्विक स्तर पर उसका प्रसार है।
बयान के मुताबिक, “उन्होंने आतंकवादी हिंसा के सभी रूपों व अभिव्यक्तियों की निंदा की। उन्होंने उनके खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत पर सहमति जताई, जो आतंकवादियों को बढ़ावा देते हैं, समर्थन तथा वित्तपोषण करते हैं और उन्हें पनाह देते हैं। आतंकवाद से निपटने को लेकर संयुक्त कार्य समूहों की नियमित बैठकों के माध्यम से इन चुनौतियों से निपटने को लेकर भारत तथा जर्मनी के बीच सहयोग का वे स्वागत करते हैं। उन्होंने कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (सीसीआईटी) को पूरा करने तथा उसे स्वीकार करने का आह्वान किया।”
साइबर सुरक्षा क्षेत्र पर जोर देते हुए मोदी ने कहा, “साइबर सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि इससे संबंधित कई सारी समस्याएं पैदा होती हैं, जिनसे फौरन निपटने की जरूरत होती है।”
उन्होंने कहा कि अगर खुफिया जानकारियां सही तरीके से साझा की गईं, तो ऐसे हालात से निपटने का हमारे पास अधिक विकल्प होगा। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत अहम भूमिका निभाता है, इसलिए हम साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब यूरोप तथा पूरी दुनिया चुनौतियों का सामना कर रही है, तो यूरोपीय संघ को पहले से अधिक मजबूत तथा एकजुट होने के लिए मर्केल जैसी प्रभावशाली नेता का दिशानिर्देश जरूरी हो जाता है।
उन्होंने कहा, “नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र में हमारा सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है।”
मोदी ने कहा कि भारत अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे को महत्ता दे रहा है और यह वह क्षेत्र है जिसमें भारत, जर्मनी के साथ मिलकर व्यापक तौर पर काम करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा स्टार्टअप सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर बल दिया गया।
मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन तथा प्रकृति के साथ समरसता पूर्वक रहना भारत के स्वभाव में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को पर्यावरण के साथ खेलने का कोई अधिकार नहीं है और हर किसी को यह समझना होगा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना नैतिक रूप से एक आपराधिक कृत्य है।
भारत और जर्मनी ने मंगलवार को चौथे चरण के द्विवार्षिक अंतर-सरकारी विमर्श (आईजीसी) की शुरुआत की। इसकी अध्यक्षता भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने अंतर-सरकारी विमर्श बैठक में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की।”
जर्मनी एकमात्र देश है, जिसके साथ भारत का इस तरह का संस्थागत संवाद तंत्र कायम है।
प्रथम आईजीसी का आयोजन 2011 में नई दिल्ली में किया गया था। इसके बाद 2013 में बर्लिन में इसका दूसरा आयोजन किया गया और तीसरा आयोजन 2015 में नई दिल्ली में किया गया था।
मोदी के साथ विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल, वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश राज्य मंत्री एम.जे.अकबर भी हैं।
इससे पहले मंगलवार को मोदी का जर्मन चांसलरी में औपचारिक स्वागत किया गया।
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