नई दिल्ली, 19 नवंबर (आईएएनएस)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) फ्रांस की एफएएम-मेडिकल अकादमी फाउंडेशन व भारत में फ्रेंच दूतावास के सहयोग से कैंसर व हृदय संबंधी रोगों के लिए सस्ती दवाओं का निर्माण करेगा।
संस्थान मेटाबॉलिक, संक्रमण व न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के क्षेत्रों में शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान के लिए एक एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरुआत करेगा, जिससे दोनों देशों के मरीजों को फायदा हो सकता है।
एफएएम के अध्यक्ष जीन मेरी ने संवाददाताओं से कहा, “फ्रांस व भारत के बीच 60 वर्षो के इतिहास में विज्ञान व प्रौद्योगिकी में सहयोग की लंबी परंपरा रही है। एक्सचेंज रिसर्च प्रोग्राम से हृदय संबंधी रोगों व न्यूरोलॉजिकल रोगों का संभावित उन्नत इलाज ढूंढने में मदद मिलेगी।”
सहयोग का उद्देश्य एक दूसरे के ज्ञान से सीख लेने पर जोर देते हुए मेरी ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य चिकित्सकों को एक साथ लाना व दोनों देशों को बेहतरीन दवाएं मुहैया कराना है।
दोनों देशों ने बांझपन के इलाज के लिए एक नई दवा का संयुक्त तौर पर विकास किया है। बांझपन का इलाज करने के अन्य तरीकों जैसे आईवीएफ की तुलना में यह सस्ती हो सकती है।
एम्स के मुताबिक, हालांकि दवा अभी परीक्षण के दौर में है और बाजार में उपलब्ध होने में उसे एक साल का वक्त लगेगा।
एम्स के निदेशक एम.सी.मिश्रा ने कहा, “इस सम्मेलन ने हमें चिकित्सा के विकास व नवोन्मेष के लिए एक सूक्ष्म दृष्टि प्रदान करने का एक मौका दिया है, जिससे दोनों देशों को फायदा होगा।”
मिश्रा ने कहा, “आने वाले समय में इस तरह के और सहयोग का हम इंतजार कर रहे हैं।”
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