नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) निर्मला सीतारमन ने बुधवार को कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के जरिए सरकार देश को निवेश करने का स्थान तथा डिजाइन और नवीन निर्माण के लिए भारत को वैश्विक हब के रूप में स्थापित करना चाहती है।
सीतारमन ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, “इसके प्रारंभिक उद्देश्य में व्यावसायिक समुदाय के अनुकूल वातावरण का निर्माण करना है, ताकि वे अपने प्रयास, संसाधन और ऊर्जा को उत्पादक कार्यो में लगा सकें। इस संबंध में नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बना दिया गया है और कई उत्पादों के लिए लाइसेंसिंग की आवश्यकता नहीं है।”
उन्होंने कहा, “सरकार विभिन्न सुविधाओं और संस्थाओं के विकास के माध्यम से व्यवसाय के लिए मजबूत ढांचा मुहैया कराना चाहती है। सरकार का लक्ष्य औद्योगिक कॉरिडोरों और स्मार्ट शहरों का विकास करते हुए आधुनिकतम प्रौद्योगिकी के साथ अनुकूल कार्य का वातावरण मुहैया कराना है।”
सीतारमन ने कहा कि राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम के माध्यम से कुशल श्रम शक्ति मुहैया कराने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। पेटेंट और ट्रेड मार्क पंजीकरण के बेहतर प्रबंधन के माध्यम से नवीनता को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए कई क्षेत्रों में इसकी अनुमति दी है। रक्षा क्षेत्र में उदारता अपनाते हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दिया है। रक्षा क्षेत्र में नवीन तथा आधुनिकतम प्रौद्योगिकी के लिए 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।”
सीतारमन ने कहा कि रेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निर्माण, परिचालन और रखरखाव में ऑटोमेटिक रूट के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की भी अनुमति दी गई है। बीमा और चिकित्सा उपकरणों के लिए उदारीकरण मानदंड अपनाए गए हैं।
dharmpath.com dharmpath