भारत से लन्दन तक का सफ़र ऑटोरिक्शा में

809px-Autorickshaw_in_New_Delhi_2005बैंगलोर शहर के निवासी नवीन रबेल्ली लन्दन तक का 10 हज़ार किमी० लंबा सफ़र ऑटोरिक्शा में करना चाहते हैं| उनका रिक्शा आम रिक्शों की तरह नहीं है, वह सौर ऊर्जा से चलता है|

नवीन रबेल्ली धरती की पर्यावरणीय समस्या के समाधान के लिए बहुत सक्रिय हैं| उन्होंने पहले अपनी सवारी यानी आम ऑटोरिक्शा के सामान्य इंजिन को इलेक्ट्रिक इंजिन में बदला और फिर उसके हुड पर सौर बैटरियों का एक पैनल लगाया| उन्होंने अपने यातायात साधन को तेजस नाम दिया है| यह पूछे जाने पर कि उन्होंने अपने यातायात साधन के लिए ऑटोरिक्शा ही क्यों चुना के जवाब में उन्होंने उसे भारत का प्रतीक बताया|

सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि नवीन रबेल्ली को अपने रिक्शा में बैंगलोर से लन्दन तक की दूरी तय करने में कितना वक़्त लगेगा| बात दरअसल यह है कि एक बार चार्ज करने पर रिक्शे की कार्य क्षमता 80 किमी होती है और फिर उसे दोबारा चार्ज करना पड़ता है| इस कारण से उनकी यात्रा लम्बी खिंच सकती है| नवीन को उम्मीद है कि जहां संभव होगा वह अपने रिक्शा को आम साकेट से चार्ज करेंगे और यात्रा के दौरान उन्हें सौर ऊर्जा से मदद मिलेगी|

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