इस्लामाबाद, 29 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पूर्व रक्षा सचिवों ने सरकार से कहा है कि भारत से संबंध सामान्य बनाने में वह अतिरिक्त सतर्कता बरते। उनका कहना है कि पाकिस्तान के प्रति भारतीय नीति में वे किसी तरह का खास बदलाव नहीं देख रहे हैं।
इस्लामाबाद, 29 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पूर्व रक्षा सचिवों ने सरकार से कहा है कि भारत से संबंध सामान्य बनाने में वह अतिरिक्त सतर्कता बरते। उनका कहना है कि पाकिस्तान के प्रति भारतीय नीति में वे किसी तरह का खास बदलाव नहीं देख रहे हैं।
‘डॉन’ की शुक्रवार की रपट के मुताबिक इस्लामाबाद स्थित थिंकटैंक स्ट्रेटजिक विजन इंस्टीट्यूट द्वारा ‘इम्पास इन पाक-इंडिया टाइज-इंप्लीकेशन्स फार रीजनल डिप्लोमेसी एंड स्ट्रेटजिक स्टैबिलिटी’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार में पूर्व विदेश सचिव अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल आसिफ यासीन मलिक ने भारत से संबंध के मुद्दे पर देश में ‘खुली एवं व्यापक’ बहस का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय रुख लोगों की सोच पर आधारित होना चाहिए न कि सरकार की सोच पर।”
भारत और पाकिस्तान समग्र द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने की कगार पर हैं। पठानकोट में आतंकी हमले से इस पर तात्कालिक असर हुआ है लेकिन दीर्घकालिक तौर पर दोनों देश वार्ता के खिलाफ नहीं दिख रहे हैं।
मलिक का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय माहौल के हिसाब से संबंधों में कुछ सुधार हो सकते हैं लेकिन किसी गुणात्मक बदलाव की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
मलिक ने कहा, “पाकिस्तान के लिए झुकना विकल्प नहीं हो सकता। हम झुकते हैं और हमें लात पड़ती है।”
मलिक ने याद दिलाया कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले अपने चुनाव अभियान में किस तरह पाकिस्तान को निशाने पर लिया था और इसे विश्व परिदृश्य में अप्रासंगिक बना देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि भारत का पाकिस्तान के साथ ‘चूहे-बिल्ली’ का खेल जारी है।
एक अन्य पूर्व रक्षा सचिव अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल नईम लोधी ने मलिक की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ‘दोषारोपण’ की नीति छोड़कर खुले मन से बात करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रफल में बहुत बड़ा देश होने और राजनैतिक माहौल भारत के पक्ष में होने की वजह से यह जरूरी है कि इन दोनों परमाणु ताकतों को एक-दूसरे से संघर्ष से दूर रखने के लिए तीसरे पक्ष की मध्यस्थता हो। इसका कोई अन्य विकल्प नहीं नजर आता।
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