नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वैज्ञानिकों से कहा कि जैव-विविधता के संरक्षण के साथ भूख और कुपोषण का समाधान खोजें।
प्रथम अंतर्राष्ट्रीय एग्रोबायोडायवर्सिटी कांग्रेस (आईएसी) में मोदी ने कहा, “आज, लाखों लोग भूख, गरीबी और कुपोषण से जूझ रहे हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी की इन चुनौतियों से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि इन चुनौतियों का समाधान खोजते हुए हम दूसरे पहलुओं, जैसे सतत विकास और जैव-विविधता के संरक्षण की अनदेखी न करें।”
वैश्विक जैव विविधता के नुकसान पर चिंता जताते हुए मोदी ने कहा कि जैव विविधता सम्मेलन 1992 के समझौते के बावजूद भी, करीब 50 से 150 जातियां विलुप्त हो चुकी हैं। आने वाले सालों में हर आठवें पक्षी और हर चौथे जानवर की प्रजाति के खोने का खतरा है।
जैव विविधता के संरक्षण के लिए मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और निजी संगठनों से संसाधनों और प्रौद्योगिकी का एक पूल बनाने को कहा, जिससे सफलता में वृद्धि हो और इस दिशा में एक साझा दृष्टिकोण तैयार किया जा सके।
भारत की संपन्न जैव विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक बहुत भू-विविधता वाला राष्ट्र है। इसके लिए इसकी विविध भौगोलिस स्थिति और कई जलवायु क्षेत्र जिम्मेदार हैं।
भारत पृथ्वी के भूभाग का 2.5 प्रतिशत है, लेकिन यहां 17 प्रतिशत मानव आबादी रहती है। यहां 18 प्रतिशत जानवरों की आबादी है और वैश्विक जैव विविधता का 6.5 प्रतिशत है।
भारतीय सभ्यता के परिवेश में प्राकृतिक संरक्षण को मिले महत्व को उजागर करते हुए मोदी ने कहा कि प्रकृति की चेतना की अवधारणा एक प्राचीन दर्शन ईशवाप्यासोपनिषद का हिस्सा है।
मोदी ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण स्थानीय पर्यावरण चुनौतियों की तैयारी के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमें जीन का परीक्षण खेतों में पर्यावरण स्थितियों में करना होगा, जिससे वह खुद को जलवायु के अनुकूल कर सके।
उन्होंने एग्रोबायोडायवर्सिटी कानूनों को अनुरूप बनाए जाने आह्वान किया, जिससे यह विकासशील देशों में किसानों के विकास और कृषि में बाधक नहीं बनें।
किसानों को शोध कार्य का हिस्सा बनाए जाने का आह्वान करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि एक तंत्र के तहत एक किसान अपने खेत में वांछनीय जीन का परीक्षण करे और इसके लिए उसे मुआवजा दिया जाए।
इंडियन सोसाइटी ऑफ प्लांट जेनिटिक रिसोर्सेज (आईएसपीजीआर) और बायोवर्सिटी इंटरनेशनल ने 6-9 नवंबर तक इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से किया है।
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