भोपाल, 26 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 31 वर्ष पूर्व हुए गैस हादसे के बाद यूनियन कार्बाइड संयंत्र परिसर के करीब रहने वालों को अब तक मुफ्त इलाज और पीने का साफ पानी नहीं मिल पाया है। इन प्रभावित परिवारों ने गुरुवार को यूनियन कार्बाइड पानी पीड़ित संघर्ष मोर्चा की अगुवाई में प्रदर्शन किया।
यूनियन कार्बाइड के परित्यक्त कारखाने के आस-पास के मोहल्लों के सैकड़ों रहवासियों ने गुरुवार केा जवाहरलाल नेहरू अस्पताल पर प्रदर्शन कर मुफ्त इलाज, साफ पानी की आपूर्ति और पानी के बिल माफ करने की मांग की और ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि लखनऊ की भारतीय विष विज्ञान शोध संस्थान (आईआईटीआर, लखनऊ) की 2013 की रिपोर्ट के मुताबिक, 22 मोहल्लों का भूजल कीटनाशक कारखाने के जहरीले कचरे की वजह से प्रदूषित हो चुका है।
उनके अनुसार, पिछले बीस से भी अधिक सालों से वे ऐसा पानी पीते आ रहे हैं, जिसमें गुर्दे, लीवर, फेफड़े और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाने वाले रसायन और भारी धातु हैं, जिनसे कैंसर तथा जन्मजात विकृतियां होती हैं।
शिव नगर की गृहिणी सुनीता ने कहा कि जहां 1984 में यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैस से प्रभावित लोगों को सरकार मुफ्त इलाज दे रही है, वहीं उसी कंपनी की वजह से प्रदूषित हुए भूजल से पीड़ित 10 हजार परिवारों को मुफ्त इलाज व साफ पानी नहीं दिया जा रहा है।
प्रदेश सरकार की संस्था पुनर्वास अध्ययन केंद्र की वर्ष 2009 की रिपोर्ट के हवाले से नवाब कालोनी के रहवासी इकबाल खां बताते हैं कि इस वैज्ञानिक शोध से यह नतीजा निकला था कि प्रदूषित भूजल वाली आबादी में श्वसन एवं पाचन तंत्र के साथ-साथ चमड़ी और आंखों की बीमारियां ज्यादा हैं।
मुफ्त इलाज के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों ने जन्मजात विकलांगता वाले बच्चों की पुनर्वास सुविधाओं की भी मांग की। ब्लूमून कालोनी की शहजादी बी बताती हैं कि बड़ी संख्या में विकलांग बच्चे पैदा हो रहे हैं।
ज्ञात हो कि इन बस्तियों में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद वर्ष 2014 में पाइप लाइन के जरिए जलापूर्ति शुरू की गई थी, मगर इन पाइप लाइन से अपर्याप्त पानी घरों तक पहुंच रहा है। इस स्थिति में इन परिवारों को मजबूरन गंदे और जहरीले पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। वहीं नगर निगम मनमाने बिल थमाए जा रही है।
ज्ञात हो कि दो-तीन दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड संयंत्र से रिसी जहरीली गैस न लगभग तीन हजार लोगों को मौत की नींद सुला दी थी। उसके बाद हजारों लोग बीमारियों के चलते मारे जा चुके हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी है। इसके अलावा कारखाने के आसपास रहने वालों को अब भी साफ पीने का पानी और मुफ्त इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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