इम्फाल, 10 जनवरी (आईएएनएस)। मणिपुर में भूकंप के एक सप्ताह बाद भी लोग सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार द्वारा राहत सामग्री उपलब्ध कराने को लेकर दिए जा रहे आश्वासन पर लोगों में असंतोष की भावना साफ नजर आ रही है।
कड़ाके की ठंड झेल रहे पीड़ितों और बेघर लोगों का कहना है कि वे बिना किसी सरकारी सहायता के अस्थायी राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं।
मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में चार जनवरी को 6.8 की तीव्रता से आए भूकंप में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 110 लोग घायल हो गए थे। इस भूकंप में तबाह हुए घरों के कारण कई लोगों को बेघर होना पड़ा।
भूकंप प्रभावित उम्मीद के साथ सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
एक स्थानीय विक्रेता एस.अपाबी ने कहा, “भूकंप चार जनवरी की सुबह आया था, लेकिन राज्यपाल वी. शमुगनाथन ने नौ जनवरी को अपने निवास से केवल 50 मीटर की दूरी पर स्थित महिलाओं के पारंपरिक विपणन परिसर में हुई क्षति का निरीक्षण किया।”
मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी और अन्य ने अभी तक भूकंप प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण नहीं किया है।
राज्य के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गाइकनघम एकमात्र निर्वाचित सदस्य हैं, जिन्होंने तामेंगलांग जिले में भूकंप प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों का दौरा किया। गाइकनघम इस क्षेत्र से राज्य विधानसभा के लिए चुने गए हैं।
इस बीच, सैकड़ों महिला विक्रेताओं ने फुटपाथ पर ही उपभोक्ता वस्तुएं, कपड़े और अन्य सामानों की बिक्री शुरू कर दी है।
एक फल विक्रेता शखीतोम्बी ने कहा, “हम दिहाड़ी मजदूर हैं। जब हम कुछ चावल लेकर घर लौटते हैं, तो हमारे बच्चे बड़ी बेसब्री से हमारा इंतजार कर रहे होते हैं।”
सड़क किनारे हथकरघा कपड़े बेचने वाली एक महिला बीना ने कहा, “हमें अपने परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए काम करने पड़ते हैं और अनुमति मिलने के बाद हम सरकार द्वारा निर्धारित अस्थायी बाजारों में चले जाएंगे।”
बीना ने कहा, “क्या कोई अनुमान लगा सकता है कि सरकार को भूकंप के कारण बाजारों के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के लिए कितना समय लगेगा?”
मुख्य सचिव ओइनाम नबकिशोर ने कहा, “सरकार ने पुनर्वास के लिए दो करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है और चार जिलों में प्रत्येक को 50-50 लाख रुपये वितरित किए जाएंगे।”
कई भूकंप पीड़ितों का कहना है कि उन्हें सरकार से एक रुपये की भी मदद नहीं मिली है। कई लोगों को डर है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने सरकार द्वारा राहत कार्य के लिए दी गई धनराशि हड़प ली है।
राज्य सरकार ने केंद्र से पीड़ितों के पुनर्वास के लिए 20 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। हालांकि, प्रभावित परिवारों का कहना है कि अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं और अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने मणिपुर में पीड़ितों की मदद का दावा किया है।
अधिकारियों से जब राहत शिविरों में रह रहे पीड़ितों में भोजन और कंबल वितरित न करने के पीछे का कारण पूछा गया, तो उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया।
एक भूकंप पीड़ित के. पानमेई ने कहा, “भाजपा और सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता सोमवार को होने वाले स्थानीय चुनाव में व्यस्त हैं।”
अधिकारियों ने कहा कि केंद्र से सरकार ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और जितेंद्र सिंह से इम्फाल में उनके दौरे के दौरान भूकंप प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर रपट मांगी थी, जो केंद्र को मिल चुकी है।
रिजिजू ने कहा, “जैसे ही रपट हमें मिलती है, हम राहत कार्य शुरू कर देंगे।”
हालांकि, अभी तक यह बात सामने नहीं आई कि आखिर क्यों किसी प्रकार की राहत सामाग्री या धन लोगों को नहीं दिया गया।
dharmpath.com dharmpath