इस नीतिपत्र में पश्चिमी आलोचनों के उस तर्क का खंडन किया गया है, जिसमें चीन को मध्यपूर्व में एक बाहरी तत्व बताया गया है। इस पत्र में चीन-अरब संबंधों में विकास के सिद्धांतों को तैयार किया गया है।
चीन-अरब सहयोग का खाका तैयार किया गया है और मध्यपूर्व में शांति और स्थिरता लाने के लिए चीन की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया है। इस दस्तावेज में मध्यपूर्व में चीन के महत्व और मध्यपूर्वी देशों के मामलों में उसकी निर्णायक भूमिका की इच्छा को दर्शाया गया है।
गौरतलब है कि बहुत लंबे समय से पश्चिमी देश चीन को बाहरी तत्व बताकर मध्यपूर्व देशों के मामलों में उसकी भूमिका की आलोचना करते रहे हैं।
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