नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के सभी पहलुओं को अच्छी तरह दर्शाने वाले सचित्र संग्रह ‘मध्य प्रदेश के कृषि एटलस’ में राज्य के भूगोल, नदियों, मिट्टी, जलवायु, जनसांख्यिकी, पशुधन, फसल चक्र और विभिन्न फसलों के उत्पादन को शामिल किया गया है। नवीनतम नक्शे और जानकारियों के साथ यह पुस्तक रोमांचक झलक प्रदान करती है।
नीति अध्ययन केंद्र और मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) के सुंयक्त प्रयास से हिंदी और अंग्रेजी दो भाषाओं में तैयार 300 पन्नों की द्विभाषी पुस्तक का राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के महासचिव भैयाजी जोशी द्वारा बुधवार को लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और इस ऐतिहासिक परियोजना से संबद्ध कई शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। कुल मिलाकर, यह पुस्तक वैसे कारकों पर प्रकाश डालती है, जिसने मध्य प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में देश का सबसे तेजी से बढ़ता राज्य बना दिया है।
यहां इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में बुधवार शाम आयोजित समारोह में मध्य प्रदेश के दो जिलों-दतिया और टीकमगढ़ के संसाधनों पर भी दो एटलस का विमोचन किया गया।
नीति अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ.जे.के. बजाज द्वारा संपादित अनुसंधान और अध्ययन पर आधारित इस पुस्तक का उद्देश्य भारत की समृद्ध सभ्यता से संबंधित प्रतिभाओं को समझना और संजोना है। मध्य प्रदेश की कृषि के सभी पहलुओं में असाधारण वृद्धि को दर्शाने वाली तस्वीरों से भरी यह हार्ड बाउंड एटलस पिछले करीब डेढ़ दशकों की यात्रा को बयां करती है। डॉ.बजाज ने समारोह के दौरान उस पर विस्तृत विवरण पेश किया। समारोह को भारतीय किसान संघ आयोजन सचिव दिनेश दत्तात्रेय कुलकर्णी, आईजीएनसीए अध्यक्ष राम बहादुर राय और एमपीसीएसटी महानिदेशक प्रमोद के.वर्मा ने भी संबोधित किया।
भैयाजी जोशी ने इस अवसर पर कहा कि इस समय देश खेती से संबंधित प्रथाओं में आजादी के बाद की ‘गलतियों’ से सीख ले रहा है और उनमें इस तरह से सुधार कर रहा है, जिससे पृथ्वी की सुरक्षा हो और खेती के बारे में ‘नीरस मानसिकता’ से लोग बाहर आ सकें।
उन्होंने कहा, “यहां तक कि किसान खुद को बेरोजगार मानते हैं। इस मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा।”
भौतिकी में पीएचडी की डिग्री रखने वाले और पूर्ववर्ती राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने बड़े पैमाने पर कृषि, अर्थव्यवस्था और समाज के बीच संबंधों पर बल दिया। उन्होंने कहा, “खेती के पैटर्न में बदलाव ने यहां के लोगों को किस प्रकार प्रभावित किया, हमेशा एक दिलचस्प विषय होगा। यह एटलस देश के सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रमुख उपलब्धि है।”
पुस्तक में नक्शे के भूगोल को समाहित किया गया है, जो राज्य की स्थलाकृति, नदियों, जलीय निकायों, मिट्टी और जलवायु पर प्रकाश डालती है। यह 1901 के आसपास से मध्य प्रदेश के जिलों में ग्रामीण-शहरी वितरण और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सहित जनसांख्यिकी पर ताजा प्रकाश डालती है।
इसके अलावा, एटलस पूरे राज्य के लिए और अलग-अलग जिलों के लिए राज्य के 1964 से 2012 तक के कृषि के विभिन्न मापदंडों के विकास का रेखांकन दस्तावेज उपलब्ध कराता है। इसमें सांख्यिकीय तालिका भी है, जिसमें सभी राज्य की सारणी और जिला स्तर के आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें नक्शे और रेखांकन में इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा, इसमें पूरे मध्य प्रदेश के भूगोल और कृषि के विभिन्न पहलुओं पर तस्वीरें पर भी उपलब्ध हैं।
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