भोपाल, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। आगामी लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने उन कई नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, जो विधानसभा चुनाव में हार गए थे। कांग्रेस की ओर से अबतक घोषित 22 उम्मीदवारों में पांच ऐसे नेता शामिल हैं।
भोपाल, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। आगामी लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने उन कई नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, जो विधानसभा चुनाव में हार गए थे। कांग्रेस की ओर से अबतक घोषित 22 उम्मीदवारों में पांच ऐसे नेता शामिल हैं।
आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से बेहतर नतीजे लाने की बड़ी चुनौती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 29 में से सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की थी और बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने रतलाम लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। इस बार के लोकसभा चुनाव के समय राज्य में कांग्रेस की सत्ता है और वह बीते लगभग चार माह के कामकाज के आधार पर अपनी बढ़त बनाने की कोशिश में है। लेकिन पार्टी ने विधानसभा चुनाव में हारे नेताओं को फिर उम्मीदवार बनाया है।
कांग्रेस ने अब तक 22 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें पांच ऐसे उम्मीदवार हैं, जो अभी हाल ही में विधानसभा का चुनाव हार गए थे। कांग्रेस ने इन हारे उम्मीदवारों में से अजय सिंह को सीधी से, अरुण यादव को खंडवा से, रामनिवास रावत को मुरैना से, प्रताप लोधी को दमोह से और मधु भगत को बालाघाट से मैदान में उतारा है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा कहते हैं, “पार्टी ने कार्यकर्ताओं के बीच एक सर्वे कराया और जिन नेताओं के नाम निकल कर आए, उन्हें उम्मीदवार बनाया गया है।”
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा कहते हैं, “राज्य में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। अजय सिंह, अरुण यादव और रामनिवास रावत पार्टी के ऐसे नेता हैं, जो जीतकर आते तो मंत्रिमंडल में उनकी बड़ी हैसियत होती। लिहाजा क्षेत्र के मतदाताओं को भी अब लगता है कि आखिर क्यों हरा दिया। मतदाताओं में सरकार किसी दल की बने और उनका विधायक दूसरे दल का हो तो चुनाव हारे नेता के प्रति सहानुभूति ज्यादा होती है।”
मिश्रा का कहना है, “कोई भी राजनीतिक दल हो, वह चुनाव जीतने के लिए सारे तौर-तरीके अपनाता है, रणनीति बनाता है। उसी के तहत कांग्रेस ने भी सहानुभूति वोट पाने की रणनीति बनाई है। जो नेता विधानसभा चुनाव हारे थे, वे पूर्व में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, उनका अपने क्षेत्र में प्रभाव भी है और उनके अलावा पार्टी के पास दूसरा जनाधार वाला नेता भी नहीं है। इस स्थिति में पार्टी ने एक तरफ जनाधार तो दूसरी ओर सहानुभूति पाने के लिए उन नेताओं पर दांव लगाया।”
मिश्रा की बात कमोवेश उचित लगती है। क्योंकि इन नेताओं ने जनता से भावनात्मक अपील की है।
पूर्व मंत्री अजय सिंह ने अपने अंदाज में लोगों से भावनात्मक अपील की है। पिछला चुनाव वह सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से साढ़े छह हजार वोटों से हार गए थे।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है, “अगर चुनाव हार गए तो यह उनका अंतिम चुनाव होगा। इस बार गड़बड़ हुई तो हमें और आपको कोई नहीं पूछेगा। कांग्रेस पार्टी मुझे कोई न कोई पद दे देगी, हो सकता है एक साल बाद राज्यसभा में भेज दे, लेकिन आप लोगों का क्या होगा।”
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