खंडवा, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के विरोध में चल रहा जल सत्याग्रह 13वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों की हालत में लगातार गिरावट आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के दल ने सत्याग्रहियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद माना कि उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है और उनका उपचार जरूरी है।
नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध का राज्य सरकार ने जलस्तर 189 मीटर से बढ़ाकर 191 कर दिया है। बांध का जल स्तर बढ़ने से खंडवा जिले के घोगलगांव तथा आसपास के कई और गांव की खेती की जमीन डूब में आने के साथ कई परिवार प्रभावित हुए हैं। इसी को लेकर ग्रामीण और नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने 11 अप्रैल से घोगलगांव में जल सत्याग्रह शुरू किया था। आंदोलन का गुरुवार को 13वां दिन है।
सत्याग्रहियों की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। सर्दी, जुकाम, बुखार के अलावा पैरों की खाल गलने के बाद उसमें से खून का रिसाव भी होने लगा है। सत्याग्रहियों की खाल अब मछलियों और जलीय जंतुओं का निवाला तक बनने लगी है।
सत्याग्रहियों की बिगड़ती हालत के बीच बुधवार को स्वास्थ्य विभाग का एक दल उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने पहुंचा। डॉ. आर. सी. पनिक के नेतृत्व में गए दल ने परीक्षण के बाद पाया कि सत्याग्रहियों की हालत बिगड़ रही है। पनिक ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए माना कि पानी में 13 दिन रहने से चमड़ी में गलन हो रही है, खून भी आ रहा है। अब उनके उपचार की जरूरत है।
वहीं नर्मदा बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ सदस्य और आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि उनका इलाज अस्पताल में नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है। सरकार चाहे तो यह आंदोलन खत्म हो सकता है।
प्रभावितों का आरोप है कि पुनर्वास नीति के तहत उन्हें लाभ नहीं मिला है और बाजिव मुआवजे से भी वंचित है। आंदोलनकारियों का कहना है कि दो सौ एकड़ से ज्यादा की जमीन बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने से डूब में आ गई है, मगर सरकार इस बात को मानने तैयार नहीं है।
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