भोपाल, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के बाजारों में दिवाली की रौनक बिखरी है। जगमग रोशनी में नहाए व्यापारिक प्रतिष्ठानों से लेकर फुटपाथों तक पर चहल-पहल है। एक तरफ दुकानदार अपना ज्यादा से ज्यादा सामान बेचने की जुगत में हैं, तो दूसरी ओर खरीदार अपने मनपसंद सामान को हर हाल में घर ले जाने को आतुर हैं। बाजार इस बात की गवाही दे रहे हैं कि ज्योति पर्व का रंग हर किसी पर चढ़ा है।
भोपाल, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के बाजारों में दिवाली की रौनक बिखरी है। जगमग रोशनी में नहाए व्यापारिक प्रतिष्ठानों से लेकर फुटपाथों तक पर चहल-पहल है। एक तरफ दुकानदार अपना ज्यादा से ज्यादा सामान बेचने की जुगत में हैं, तो दूसरी ओर खरीदार अपने मनपसंद सामान को हर हाल में घर ले जाने को आतुर हैं। बाजार इस बात की गवाही दे रहे हैं कि ज्योति पर्व का रंग हर किसी पर चढ़ा है।
वैसे तो खरीदारी धनतेरस के दिन ही हो जाती है, मगर उसके बाद भी बाजारों की रौनक में कमी नहीं आई है। यह बात अलग है कि धनतेरस के मौके पर जो भीड़ जेवरात से लेकर बर्तन व इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की दुकानों पर थी, वह खिसक कर कपड़ों, मिठाई, पटाखों, मिट्टी के दीयों, चाकलेट के डिब्बों, डाई फ्रूट के डिब्बों, रंग-बिरंगी झालरों की दुकानों की ओर पहुंच गई।
राजधानी के मारवाड़ी बाजार, न्यू मार्केट, दस नंबर बाजार, बिट्ठल बाजार से लेकर शहर की सड़कों के किनारे खरीदारों की चहल-पहल है। फुटपाथ पर छोटी सी दुकान लगाकर दिए बेचने वाली महिला सुमन बाई बताती हैं कि वह साल में दिवाली के मौके पर ही दिये बेचने आती हैं।
वह कहती हैं कि दीये में मुनाफा कम है, मगर उनका परिवार कई पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन बनाते आए हैं, अब भी उनका पेशेवर काम यही है। नई पीढ़ी जरूर इससे दूर हो रही है, लेकिन उन्होंने इसे नहीं छोड़ा है।
इसी तरह सड़क किनारे टेबल पर झालरें बेच रहे शिवकुमार इस पर्व पर अच्छी कमाई कर लेना चाहते हैं। वह बताते हैं कि उसका कोई स्थायी कारोबार नहीं है। उनके पिता की छोटी सी परचून की दुकान है। वह कभी-कभी दुकान पर बैठते हैं, मगर उन्हें लगा कि दीवाली पर झालर आदि बेचकर अच्छी कमाई की जा सकती है, लिहाजा उसने सड़क किनारे फुटपाथ पर दुकान खोल ली।
मारवाड़ी बाजार में कपड़े खरीद रही नेहा कहती हैं कि वह दीपावली पर ऐसे कपड़े खरीदना चाहती हैं, जो किसी और के पास न हो। वह एक से ज्यादा दुकानों पर गईं मगर कम ही जगह उसे अपनी पसंद के कपड़े नजर आए। आखिर में उन्होंने ऐसा लहंगा चुनरी खरीदा है, जिसे जब भी वह पहनेगी, वह उन्हें दीवली की याद दिलाता रहेगा।
इसके अलावा, इस बार चॉकलेट और डाई फ्रूट के डिब्बे बेचने वाले भी बड़ी तादाद में ग्राहकों को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। आकर्षक उपहार पैक सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। एक संस्थान में नौकरी करने वाले राज किशोर बताते हैं कि उनकी कंपनी ने कई अधिकारियों के घरों तक भेजने के लिए उपहार पैक खरीदे हैं। इन डिब्बों को घर-घर भेजा जा रहा है।
बाजारों में यह रौनक आगे भी बनी रहेगी, क्योंकि भाईदूज के दिन भी बाजारों में खरीदारी का दौर चलता है। उस दिन सबसे ज्यादा खरीदारी मिठाई और कपड़ों की होती है, क्योंकि भाई-बहन एक दूसरे को उपहार में ज्यादातर कपड़े व मिठाई देते हैं।
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