मप्र पुलिस का नाकामी छुपाने का नया खेल, मनचलों को पकड़ो

भोपाल, 22 मार्च (आईएएनएस)। पुलिस या खाकी वर्दी का जिक्र आते ही आम लोगों में सुरक्षा का भाव आता है लेकिन मध्य प्रदेश की पुलिस बड़े मामलों के खुलासे और प्रभावशाली लोगों को पकड़ने की नाकामी की भरपाई मनचलों के नाम पर गरीब युवाओं का जुलूस निकालकर कर रही है। पुलिस ने आम आदमी का अपराधिक घटनाओं और अपराधियों की ओर से ध्यान हटाने के लिए यह नया खेल शुरू किया है।

भोपाल, 22 मार्च (आईएएनएस)। पुलिस या खाकी वर्दी का जिक्र आते ही आम लोगों में सुरक्षा का भाव आता है लेकिन मध्य प्रदेश की पुलिस बड़े मामलों के खुलासे और प्रभावशाली लोगों को पकड़ने की नाकामी की भरपाई मनचलों के नाम पर गरीब युवाओं का जुलूस निकालकर कर रही है। पुलिस ने आम आदमी का अपराधिक घटनाओं और अपराधियों की ओर से ध्यान हटाने के लिए यह नया खेल शुरू किया है।

राजधानी से लेकर छोटे शहरों में आए दिन युवती, महिलाओं से छेड़छाड़, दुष्कर्म और पीड़िता द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले लगभग हर रोज सामने आ रहे हैं। पुलिस इन वारदातों पर अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम है। हर तरफ से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने भी एक अनोखा रास्ता खोज निकाला है। वह मनचलों को पकड़ने में जुट गई है। हर रोज अखबारों और क्षेत्रीय समाचार न्यूज चैनल में मनचलों का जुलूस निकालने और उठक-बैठक लगवाने की तस्वीरें प्रमुखता से नजर आ जाती हैं।

सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विजय वाते ने आईएएनएस से कहा, “मनचलों का जुलूस निकालना पुलिस का टोना-टोटका जैसा है। वास्तव में पुलिस का काम है कि वह कानून व नियम के तहत काम करे। अपराधी छोटा हो या बड़ा सभी के साथ एक जैसा सलूक किया जाना चाहिए। जुलूस निकालने से अपराधियों में खौफ पैदा होगा, ऐसा नहीं लगता। सर्वोच्च न्यायालय तो आरोपी को हथकड़ी तक लगाने के खिलाफ है मगर यह जुलूस निकालने का अधिकार पुलिस को किस नियम या कानून के तहत मिला है यह समझ से परे है।”

वाते आगे कहते हैं कि कानून के लिए न तो कोई छोटा होता है और न ही कोई बड़ा, जिसने अपराध किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कानून का पालन हर छोटे-बड़े व्यक्ति को करना होगा तभी अपराधों पर अंकुश लग सकेगा।

राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं को बालिकाओं और युवतियों का सबसे बड़ा हितैषी बताते हैं। उन्होंने 12 वर्ष की आयु तक की बालिकाओं से दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा देने का कानून पारित कर केंद्र सरकार को भेजा है। चौहान के इस कदम के बाद भी राज्य में बालिकाओं, महिलाओं से छेड़छाड़ और अन्य तरह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

यहां बताना लाजिमी होगा कि पिछले दिनों राज्य के लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह की बहू प्रीति रघुवंशी ने आत्महत्या कर ली थी। शुरू में सिंह ने प्रीति को अपनी बहू मानने से इंकार किया जब आर्य समाज का विवाह प्रमाण पत्र सामने आया तो बाद में उन्हें प्रीति को बहू स्वीकारना पड़ा। उनका बेटा गिरिजेश सिंह भी अस्थि संचय के कार्यक्रम में गया था।

प्रीति के परिजन लगातार रामपाल के बेटे पर आरोप लगा रहे हैं कि वह दूसरी शादी करने जा रहा था जिससे प्रीति दुखी थी और इसीलिए उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। इस मामले को विपक्षी दल कांग्रेस ने विधानसभा में उठाया था। सरकार की ओर से यही कहा गया कि कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी और पुलिस इसकी जांच कर रही है।

कांग्रेस का आरोप है कि मप्र में 2004 से लगातार अपराधों में इजाफा हो रहा है। महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों की स्थिति यह है कि 2004 से 2016 तक 46,308 दुष्कर्म की घटनाएं हुईं, जो देश में सर्वाधिक हैं। 2004 में 2,875 दुष्कर्म की नृशंस घटनाएं हुईं वे आज बढ़कर प्रतिवर्ष 4,909 के आंकड़े पर पहुंच गई हैं। वहीं, बच्चियों, महिलाओं के अपहरण मामलों की संख्या 2004 में 584 थी वह आज बढ़कर प्रति वर्ष 4,904 पर पहुंच गई है यानी ये मामले लगभग 10 गुना बढ़े हैं।

पूर्व मुख्य सचिव और सामाजिक कार्यकर्ता निर्मला बुच का मानना है कि मनचलों का जुलूस आदि निकालने से शुरुआती दौर में तो असर दिख रहा है मगर इसे ज्यादा किया गया तो थोड़ा बहुत जो भय पैदा हुआ है वह भी खत्म हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि फिर मनचलों को लगने लगेगा कि यह तो सभी का जुलूस निकाल रहे हैं। पुलिस को चाहिए कि वह सख्त कार्रवाई करे।

महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत रोली शिवहरे का मानना है कि पुलिस और सरकार को महिला सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी होगी। ‘मजनू पकड़ो’ जैसे अभियान कुछ दिन चलते हैं और ठप पड़ जाते हैं। जब तक किसी नामचीन अपराधी की उठक-बैठक नहीं लगवाई जाएगी तब तक भय पैदा होना मुश्किल है।

राज्य में पुलिस ने मनचलों के खिलाफ मुहिम चलाई है उनके जुलूस निकाले जा रहे हैं मगर एक भी बदमाश किसी जिले का ऐसा नजर नहीं आया जिसे सब जानते हों और उसे लोगों ने जुलूसों में उठक-बैठक लगाते देखा हो। राज्य में सटोरिए, मादक पदार्थो के सप्लायर, लूटपाट करने वाले अपराधी सक्रिय हैं मगर पुलिस सस्ती लोकप्रियता के लिए इस तरह के अभियान चलाने में ज्यादा दिलचस्पी लेती है।

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