मप्र : व्यापमं घोटाले के आरोपियों की मौत का मामला गरमाया

भोपाल, 30 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में हुए व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाल से जुड़े आरोपियों की हो रही मौतों के मामले ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां मौतों की संख्या पर सवाल उठाकर विशेष जांच दल (एसआईटी) को ज्ञापन सौंपकर वास्तविकता का खुलासा करने की मांग की है, वहीं मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इन मौतों के पीछे ‘गहरी साजिश’ की आशंका जताई है।

बीते दिनों में व्यापमं घोटाले से जुड़े दो आरोपियों की मौत के बाद से राज्य में एक बार फिर व्यापमं पर बहस छिड़ गई है। मीडिया रिपोर्ट और कांग्रेस जहां मौत का आंकड़ा 42 बता रही है, वहीं एसटीएफ ने यह संख्या 23 बताई थी। एसआईटी भी पहले मौतों की संख्या 40 के आसपास बता चुकी है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को व्यापमं घोटाले की उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कर रही एसआईटी के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रेश भूषण को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया है कि हाल ही में आपराधिक प्रकरणों में जुड़े विभिन्न व्यक्तियों की समय-समय पर हुई मौतों की जांच कर वास्तविकता को उजागर किया जाए, ताकि फैल रहे भ्रम का निवारण हो सके।

चौहान ने कहा कि व्यापमं के बारे में प्राथमिकी दर्ज होने के पहले ही आपराधिक प्रकरणों से संबंधित कुल 25 व्यक्तियों में से 11 व्यक्तियों की मौत हो चुकी थी। आपराधिक मामलों से जुड़े छह आरोपियों की दुर्घटना में और छह की बीमारी में मौत हुई। दो आत्महत्या के प्रकरण हैं। अभी तक किसी भी व्यक्ति ने इस संबंध में किसी आपराधिक षड्यंत्र की शिकायत एसआईटी, एसटीएफ के समक्ष दर्ज नहीं की है।

चौहान ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है, तथापि जनभ्रम का निवारण कर मौतों के बारे में एसआईटी जांच करे तथा उच्च न्यायालय को तथ्यों से अवगत कराया जाए। इससे जनता में फैले भ्रम का निवारण करने में मदद मिलेगी।

वहीं दूसरी ओर, माकपा के प्रदेश सचिव बादल सरोज ने कहा कि व्यापमं घोटाले से जुड़े गवाहों की एक के बाद एक हो रही मौतें योजनाबद्ध षड्यंत्र के रूप में सामने आने लगी हैं। किसी अपराध को छुपाने और उसमे फंसे बड़े मुजरिमों को बचाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस ‘व्यापकतम घोटाले’ की जांच कर रही एसआईटी और एसटीएफ जैसी जांच एजेंसियां अपना औचित्य खो चुकी हैं। इनकी तफ्तीश से कुछ नहीं निकलने वाला। इनका एकमात्र काम मुख्यमंत्री, भाजपा और आरएसएस के शीर्ष नेताओं को बचाने भर का बचा है।

सरोज ने मांग की है कि व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। उधर, दिल्ली में कांग्रेस ने इस घोटाले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की है।

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