भोपाल/शिवपुरी, 4 जनवरी (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सहरिया, बैगा और भारिया जनजाति को एक हजार रुपये मासिक और अन्य सुविधाओं का ऐलान किए जाने के बाद अन्य आदिवासी जातियां भी इसी तरह की सुविधाएं मांगने लगी हैं। शिवपुरी में मोगिया जनजाति के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के पोहरी विधायक से मुलाकात कर अपना हाल बयां किया और सुविधाओं की मांग की।
शिवपुरी जिले के एक बड़े हिस्से में मोगिया जनजाति के परिवार निवास करते हैं। उनकी भी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। मोगिया आदिवासी वर्ग की कई महिलाएं और पुरुष बुधवार को पोहरी विधायक प्रहलाद भारती के घर पहुंचे और उन्होंने उन योजनाओं का लाभ मांगा, जो सहरिया आदिवासियों के लिए शुरू की गई हैं।
मोगिया आदिवासी वर्ग से जुड़ी महिलाओं ने कहा कि उनके बच्चे भी कुपोषण की श्रेणी में आते हैं, इसलिए शिवराज सरकार द्वारा जो एक हजार रुपये प्रतिमाह देने की योजना शुरू की गई है, उसका लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए।
पोहरी के विधायक प्रहलाद भारती ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया कि सहरिया, बैगा व भारिया आदिवासी अति पिछड़े में आते हैं, लिहाजा सरकार ने उन्हें विशेष सुविधा दी है। मोगिया आदिवासी भी उनसे मिले हैं, ज्ञापन दिया है, इसके लिए उनकी ओर से प्रयास होंगे।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सहरिया, बैगा और भारिया जनजाति के कुपोषण को कम करने के लिए इस वर्ग की महिलाओं के खाते में एक हजार रुपये प्रतिमाह देने के साथ एक रुपये की दर से गेहूं, चावल, नमक और 10 रुपये किलो दाल देने का ऐलान किया है।
चौहान के इस ऐलान को शिवपुरी के कोलारस में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि यहां सहरिया आदिवासी परिवार बड़ी तादाद में हैं।
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कहना है कि प्रदेश में 14 वर्षो से भाजपा की सरकार है और शिवराज 12 साल से मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उन्हें इस वर्ग की याद अब क्यों आई? साफ है कि कोलारस, मुंगावली में इस वर्ग के परिवारों की बड़ी संख्या है। यह ध्यान में रखते हुए यह सिर्फ वोट के लिए ऐलान है, चुनाव के बाद सब बंद हो जाएगा।
आदिवासियों के बीच लंबे अरसे से काम कर रही एकता परिषद के सदस्य मनीष राजपूत का कहना है कि राज्य सरकार का एक हजार रुपये मासिक भत्ता देने और अन्य सुविधाओं का ऐलान सिर्फ कोलारस में चुनावी लाभ पाने का झुनझुना है। सरकार अगर वास्तव में इस वर्ग का कल्याण चाहती थी, तो उसने उपचुनाव से ठीक पहले यह ऐलान क्यों किया, इसीलिए सरकार की मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है।
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