यवतमाल (महाराष्ट्र), 14 मई (आईएएनएस)। किसानों के हित के लिए काम करने वाली एक संस्था ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार की उस योजना की आलोचना की है जिसमें किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में कमी लाने के लिए मनोवैज्ञानिक तथा मनोरोग संबंधी परामर्श दिए जाने की बात कही गई है।
विदर्भ जन आंदोलन समिति (वीजेएएस) के प्रमुख किशोर तिवारी ने इसे पागलपन भरा सर्वेक्षण करार देते हुए कहा कि यह किसानों को किसी भी प्रकार की वित्तीय मदद देने से बचने का एक और बहाना है।
तिवारी ने आईएएनएस से कहा, “स्वास्थ्य मंत्री दीपक सावंत ने परेशान किसानों पर पागलपन भरे सर्वेक्षण की घोषणा कर एक और विवाद खड़ा कर दिया है, जबकि अन्य मंत्री रासायनिक उवर्रक के इस्तेमाल को खत्म करने के लिए मुंबई के मल्टीप्लेक्स से पेशाब इकट्ठा करने पर बड़ी सब्सिडी देने का वादा कर रहे हैं।”
सावंत ने बुधवार को अत्यधिक प्रभावित यवतमाल और उस्मानाबाद जिले के पांच उप-क्षेत्र में एक पायलट परियोजना की घोषणा की, जिसका उद्देश्य किसानों को मनोवैज्ञानिक परामर्श देना है।
मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एक्रिडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट (आशा) के सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल किए जाएंगे और किसानों की खुदकुशी तथा उसके तरीके के अध्ययन के बाद पांच क्षेत्रों को चुना गया है।
सावंत ने कहा, “हमें यह स्वीकार करना है कि मानसिक स्वास्थ्य एक मुद्दा है, लेकिन इसका उपचार संभव है।”
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान वे किसानों के कर्ज भार का भी पता लगाएंगे।
तिवारी ने कहा कि कृषि मंत्री एकनाथ खडसे का असंवदेनशील बयान कि सरकार के पास किसानों, गैर-जनजातीय किसानों की आत्महत्या रोकने का कोई उपाय मौजूद नहीं है, बेहद अनैतिक है, जबकि किसानों के मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने की बात स्वास्थ्य मंत्री द्वारा कहा जाना आग में घी का काम कर रहा है।
तिवारी ने कहा, “हम कृषि संबंधी समस्या के समाधान के लिए उठाए जा रहे इन प्रतिकूल कदमों से हैरान हैं। वास्तव में मनोवैज्ञानिकों को यवतमाल और उस्मानाबाद भेजे जाने की जगह मंत्रियों तथा नेताओं के मानसिक स्वास्थ्य का परीक्षण करने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सूखे से पांच करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिसकी वजह गलत आर्थिक नीतियां, खराब फसलों का चुनाव और प्राकृतिक आपदा है, बावजूद इसके केंद्र तथा राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार देश के किसानों की गंभीर समस्या को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है।
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