नागपुर, 19 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र और मध्य भारत के विभिन्न बाघ अभयारण्यों में कार्यरत सैकड़ों पर्यटक गाइडों और वाहन चालकों ने आज विदेशी पर्यटकों से भारतीय बाघ अभयारण्यों का बहिष्कार करने की अपील करने वाली ब्रिटेन स्थित गैर सरकारी संगठन सर्वाइवल इंटरनेशनल (एसआई) के खिलाफ प्रदर्शन किया।
बाघ एवं जंगल संरक्षण के लिए काम करने वाले सतपुड़ा फाउंडेशन सहित कई संगठनों ने पेंच टाइगर रिजर्व (पीटीआर) और नवेगांव-नगजीरा टाइगर रिजर्व (एनएनटीआर) पर पहुंच कर ब्रिटिश संस्था और उसके निर्देशक स्टीफन कॉरी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
संस्था ने एक सार्वजनिक ईमेल के माध्यम से भारत सरकार पर आदिवासियों को उनके घरों से बेदखल कर उनके अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाते हुए विदेशी पर्यटकों से भारत में स्थित 50 बाघ अभयारण्यों का बहिष्कार करने का आग्रह किया है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के आंकड़ों के अनुसार, भारत के 18 प्रांतों में स्थित 50 बाघ अभयारण्यों में लगभग 2,226 बाघ हैं, जो विश्व में सर्वाधिक है। इस अभयारण्यों में प्रतिवर्ष एक करोड़ से ज्यादा पर्यटक घूमने आते हैं, जिनमें 15 प्रतिशत विदेशी पर्यटक होते हैं।
वन पर्यटन आय का प्रमुख स्त्रोत है, जो लगभग 80,000 लोगों को प्रत्यक्ष और लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार प्रदान करता है।
सतपुड़ा फाउंडेशन के अध्यक्ष किशोर रीते ने इसे भारत विरोधी अभियान बताते हुए एसआई पर हमला किया और कहा कि उन्हें स्थानीय स्थिति और जमीनी सच्चाई की जानकारी नहीं है।
रीते ने आईएएनएस को बताया, “हमारे आदिवासी और जंगल में रहने वाले लोग इन जंगलों की रक्षा करते हैं और वन्यजीव पर्यटन के माध्यम से लाभ अर्जित करते हैं। अकेले तडोबा-अन्धारी बाघ अभयारण्य (टीएटीआर) से ही प्रतिवर्ष पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की आय होती है, जिसका एक बड़ा हिस्सा स्थानीय समुदाय के विकास के लिए लगाया जाता है।”
उन्होंने कहा कि टीएटीआई और अन्य बाघ अभयारण्य उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार चलते हैं और इस संदर्भ में एनटीसीए के दिशानिर्देश उनके लिए विजयी स्थिति बनाते हैं।
एसआई के अभियान की निंदा करते हुए उन्होंने बताया कि विभिन्न बाघ अभयारण्यों के जंगलों में या उनके पास रहने वाले ग्रामीण या आदिवासी इससे खुश हैं, क्योंकि पर्यटन और संरक्षण से उन्हें रोजगार मिलता है।
एनएनटीआर के मुकुंद धुर्वे ने कहा कि वे अपना संदेश मध्य भारत में स्थित सातों बाघ अभयारण्यों तक पहुंचाना चाहते हैं। वे एसआई द्वारा फैलाए गए भ्रामक और हानिकारक जानकारियों के प्रति भारतीय आदिवासी समुदायों की भावनाओं और विचारों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना चाहते हैं।
विदेशी पर्यटकों से भारतीय आदिवासियों के नाम पर अपील करना बिल्कुल भी नैतिक नहीं है। इस संस्था को उनकी वकालत करने का अधिकार किसी ने नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वे भारत सरकार से संस्था के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आग्रह करेंगे।
हरेक बाघ अभयारण्य औसतन 1500 रोजगार पैदा करता है। इसके अलावा विभिन्न पर्यटन गतिविधियां होने से पर्यटन कोष बढ़ने के साथ-साथ कुछ हजार लोगों को इनसे अप्रत्यक्ष रूप से भी रोजगार मिलता है।
रीते ने कहा कि जब से विदेशी पर्यटकों ने ताजमहल, अजंता-एलोरा की गुफाओं सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर जाना शुरू किया है, तबसे देश भर के बाघ अभयारण्यों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है।
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