नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम ने बुधवार को कहा कि देश के सकल घरेलू (जीडीपी) उत्पाद में महिलाओं का योगदान बेहद कम है। उन्होंने कृषि कार्य में संलग्न महिलाओं को प्रबंधन, नियोजन तथा तकनीकी कौशल प्रदान करने की जरूरत को रेखांकित किया।
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल महासंघ (फिक्की) तथा इंटेल इंडिया द्वारा आयोजित एक सेमिनार ‘एक्सीलेरेटिंगवूमेन एंटरप्रेन्योरशिप’ के उद्घाटन सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि भारत में उद्यमी होने का मतलब तकनीकी या औद्योगिक उत्पादन करना है।
उन्होंने कहा, “लोग शायद ही कृषि पर ध्यान देते हैं, जहां से वह पैसा कमा सकते हैं। भारत में कृषि कार्य महिलाओं द्वारा किया जाता है। सर्वाधिक मेहनत के बावजूद प्रबंधन व वित्त संबंधी मामले पुरुषों द्वारा निर्देशित होते हैं। कुल मेहनत में महिलाओं का हिस्सा 80-87 फीसदी तक होता है, जबकि इससे हुई कमाई में उनका हिस्सा मुश्किल से लगभग एक फीसदी तक होता है।”
कुमारमंगलम ने सवाल किया कि महिलाओं को योगदानकर्ता के तौर पर क्यों नहीं देखा जाता है।
उन्होंने कहा, “घर के काम को तो छोड़ दीजिए, घर से बाहर महिलाएं जो काम करती हैं, उसकी गिनती नहीं होती। मैं यह नहीं कह रही कि उन्हें शामिल करने से जीडीपी के आंकड़ों में तेजी से बढ़ोतरी हो जाएगी। लेकिन जीडीपी की गणना में महिलाओं का योगदान बहुत कम है।”
पैनल चर्चा ‘वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप : कैटेलिस्ट्स फॉर ग्रोथ’ में सीको टेक्नोलॉजिज की अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक अनासूया गुप्ता ने कहा कि भारत में महिलाओं की उद्यमशीलता का समर्थन करने व विकसित करने की अपार संभावना है।
गुप्ता ने कहा, “महिलाओं की आय क्षमता को बढ़ाना देश की प्राथमिकता होनी चाहिए। महिला सशक्तीकरण न केवल भारत की विकास क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक मंच का काम करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह सकारात्मक सामाजिक माहौल का निर्माण करेगा।”
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