महिलाओं को हाजी अली दरगाह के मजार क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति (लीड-1)

मुंबई, 26 अगस्त (आईएएनएस)। बम्बई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महिलाओं को हाजी अली दरगाह के प्रतिबंधित मजार क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दे दी।

यह दरगाह मुंबई के वरली तट के निकट एक छोटे से टापू पर स्थित है। इसमें सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की मजार है जिनके प्रति विभिन्न समुदायों के लोग श्रद्धा जताते हैं।

एक गैर सरकारी संगठन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन तथा महिला कार्यकर्ता नूरजहां नियाज और जाकिया सोमन ने दरगाह के अंदरूनी हिस्से में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक के खिलाफ अदालत में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला दिया।

न्यायमूर्ति वी. एम. कनाडे और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-धेरेकी खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।

इस जनहित याचिका में 1431 में निर्मित इस दरगाह के मजार क्षेत्र में महिलाओं के प्रवेश को रोक लगाने वाले हाजी अली दरगाह ट्रस्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।

दरगाह के इस हिस्से में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के साथ-साथ अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया है।

अदालत ने महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को संविधान में दिए गए मूलभूत अधिकारों के खिलाफ बताया। अदालत ने इस फैसल को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने के लिए इस पर छह सप्ताह के लिए रोक लगा दी है।

हाजी अली दरगाह ट्रस्ट के प्रवक्ता ने कहा कि फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जाएगी।

ट्रस्ट ने जून 2012 में महिलाओं के प्रवेश पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इस्लाम में महिलाओं को पुरुष संतों की कब्रों को छूने की अनुमति नहीं है और उनके लिए कब्र वाले स्थान पर जाना पाप है।

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