लंदन, 8 फरवरी (आईएएनएस)। इंटरनेट से जरिए बातचीत पर आधारित उपचार मानसिक रोगियों के लिए काफी प्रभावी हो साबित हो सकती है। एक ताजा शोध में यह खुलासा किया गया है।
‘बॉडी डिस्मोर्फिक डिसॉडर’ (बीडीडी) बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति अपने व्यक्तित्व के प्रति भ्रम में रहता है और उनका अधिकांश समय अपने रूप-रंग को लेकर सोचते हुए गुजर जाती है।
अध्ययन में कहा गया है कि इंटरनेट पर बातचीत के जरिए उपचार प्रदान करने के लिए तैयार किया गया ‘कॉग्निटिव बीहैवियरल थेरेपी’ (सीबीटी) कार्यक्रम बीडीडी ग्रस्त रोगियों का जीवन सुधारने में मददगार हो सकती है।
स्टॉकहोम के कारोलिंस्का यूनिवर्सिटी अस्पताल के शोधकर्ताओं के अनुसार, “सीबीटी उपचार प्रणाली रोगियों अपने व्यक्तित्व के बारे में अपना नजरिया बदलने और अपने व्यवहार में बदलाव लाने में मददगार है और रोगियों की देखभाल में काफी लाभकारी है।”
शोध-पत्रिका ‘बीएमजे’ के ताजा अंक में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन के अनुसार, बीडीडी से हल्के प्रभावित रोगियों को सामान्य चिकित्सकों की मदद से यह उपचार प्रदान किया जा सकता है, लेकिन गंभीर रोगियों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही यह उपचार दिया जाना चाहिए।
इस शोध में 94 वयस्क रोगियों को शामिल किया गया और 21 सप्ताह उनमें से कुछ को बीडीडी प्रणाली से जबकि कुछ को अन्य तरीके का उपचार प्रदान किया गया।
इस इलाज के दौरान किसी भी रोगी का चिकित्सक के साथ आमना-सामना नहीं हुआ।
जिन रोगियों का इलाज सीबीटी प्रणाली से किया गया, उनमें अन्य प्रणाली से उपचार लेने वाले रोगियों के मुकाबले अधिक सुधार देखा गया।
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