नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। कर्ज नहीं चुकाने के मामले में फंसे उद्योगपति विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए ऋण निपटारे के लिए 4,000 करोड़ रुपये भुगतान करने की पेशकश की है। 13 बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज दे रखा है।
भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्ववाले इन 13 बैंकों के संघ की ओर से यह जानकारी बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में दी गई। मामले की अगली सुनवाई अब सात अप्रैल को होगी।
न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ. नरीमन की पीठ को यह भी बताया गया है कि माल्या ने पेशकश की है कि यदि उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के खिलाफ किए गए मुकदमे में जीत मिलती है तो वह उससे हासिल होने वाली 2,000 करोड़ रुपये की राशि देने को तैयार हैं।
माल्या और किंगफिशर एयरलाइंस की ओर से पेश वकील सी. एस. वैद्यनाथन ने न्यायालय से कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मुख्य महाप्रबंधक के समक्ष बुधवार सुबह बकाया चुकाने का प्रस्ताव पेश किया गया है।
माल्या का एसबीआई को दिया गया प्रस्ताव सीलबंद लिफाफे में न्यायालय में पेश किया गया। वैद्यनाथन ने न्यायालय से आग्रह किया कि उसे सीलबंद ही रखा जाए और इसे मीडिया तक नहीं पहुंचना चाहिए।
वैद्यनाथन ने कहा, “बकाया निपटारे के लिए बातचीत चल रही थी, लेकिन दुर्भाग्य से मामला मीडिया तक पहुंच गया।”
न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि मीडिया ने तो माल्या की बंद एयरलाइंस से कितना वसूला जाना है, केवल उसका उल्लेख किया है।
इसके बाद एसबीआई के नेतृत्ववाले 13 बैंकों के संघ का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एस. एस. नागानंद ने माल्या के प्रस्ताव का विस्तृत खुलासा कर दिया।
उन्होंने न्यायालय से कहा कि माल्या के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए उनकी मुवक्किल और इन बैंकों के संघ की अध्यक्ष अरुं धति भट्टाचार्य को एक सप्ताह का समय चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2013 में बैंक ने एक मुकदमा दाखिल कर 6,903 करोड़ रुपये और भुगतान की तिथि तक उस पर ब्याज की मांग की थी।
नागानंद की दलील स्वीकार करते हुए न्यायालय ने संघ को एक हफ्ते का समय दे दिया। न्यायालय ने कहा कि अगली सुनवाई सात अप्रैल को होगी।
न्यायालय द्वारा माल्या के मौजूदा ठिकाने के बारे में पूछे जाने पर उनके वकील वैद्यनाथन ने कहा कि माल्या अब भी विदेश में हैं। भारत से लंदन जाने के बाद उन्होंने बैंक के अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दो बार बातचीत की हैं। उसके बाद एसबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में माल्या की व्यक्तिगत पेशी के लिए याचिका दायर की है।
इससे पहले माल्या को देश छोड़ने से रोकने के लिए एसबीआई के नेतृत्व वाले 13 बैंकों का अल्पकालिक संघ सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा था, लेकिन जब तक नौ मार्च को इस याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई करती, माल्या लंदन चले गए।
ये बैंक माल्या से नौ हजार करोड़ रुपये वसूलना चाहते हैं। उनका कहना है कि किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए कर्ज के बदले माल्या की गारंटी के तौर पर जो संपत्तियां हैं, वे कर्ज की 1/15 फीसदी भी नहीं हैं।
एसबीआई के अलावा अन्य बैंकों ने जो किंगफिशर को कर्ज दिए हैं, वे हैं- बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, एक्सिस बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, जम्मू एवं कश्मीर बैंक, आईडीबीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, यूको बैंक और युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया।
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